केदारनाथ सहित इन ज्योतिर्लिंगों में भी शिवलिंग को छूना है बिल्कुल वर्जित, जानें क्या है कारण

Update: 2026-02-09 02:30 GMT

नई दिल्ली। केदारनाथ सहित कई प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में गर्भगृह के शिवलिंग को सीधे छूना वर्जित है, यहाँ केवल दूर से दर्शन और पूजा (स्पर्श की मनाही) की परंपरा है। यह मान्यता विशेष रूप से केदारनाथ, महाकालेश्वर, और काशी विश्वनाथ जैसे स्थानों पर प्रबल है, जहाँ परंपरा का निर्वहन और शिवलिंग की सुरक्षा मुख्य वजहें हैं।

6 मुख्य स्थान जहां स्पर्श करना है मना (या वर्जित है):

केदारनाथ (उत्तराखंड): केदारनाथ मंदिर में मुख्य शिवलिंग को छूने की मनाही है; श्रद्धालु केवल दूर से पूजा करते हैं और स्वयंभू रूप में भगवान शिव की पूजा होती है।

महाकालेश्वर (उज्जैन, मध्य प्रदेश): यहां भस्म आरती के दौरान गर्भगृह में जाने की मनाही होती है, और शिवलिंग को सीधे स्पर्श करने से रोका जाता है।

काशी विश्वनाथ (वाराणसी, उत्तर प्रदेश): यहां मुख्य शिवलिंग को छूना वर्जित है, केवल दूर से जल या दूध अर्पित किया जा सकता है।

ओमकारेश्वर (मध्य प्रदेश): यहां शिवलिंग को छूने की अनुमति नहीं है, केवल बाहर से दर्शन किए जा सकते हैं।

त्र्यंबकेश्वर (नासिक, महाराष्ट्र): यहां ज्योतिर्लिंग का स्पर्श नहीं किया जा सकता, केवल दूर से पूजा की जाती है।

ग्रिश्नेश्वर (औरंगाबाद, महाराष्ट्र): यहां भी गर्भगृह के शिवलिंग को सीधे छूना वर्जित है, और दूर से दर्शन की परंपरा है।

वजह (क्यों है स्पर्श वर्जित?)

पौराणिक मान्यताएं: मान्यता है कि भगवान शिव यहां स्वयंभू (स्वयं प्रकट) हुए थे, और उनके स्पर्श से ऊर्जा का प्रवाह इतना तीव्र होता है कि उसे सहन करना आम भक्तों के लिए मुश्किल है।

संरक्षण: केदारनाथ में स्वयंभू शिवलिंग के सदियों पुराने प्राकृतिक पत्थर की सुरक्षा के लिए, सीधे स्पर्श करने पर रोक लगाई जाती है।

धार्मिक परंपरा: कुछ स्थानों पर विशिष्ट पूजा पद्धति के अनुसार, केवल पुजारियों को ही गर्भगृह में प्रवेश और पूजा करने की अनुमति होती है।

भीड़ और अव्यवस्था: महाकालेश्वर और काशी विश्वनाथ जैसे प्रसिद्ध स्थानों पर अत्यधिक भीड़ के कारण भी स्पर्श वर्जित किया गया है।

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