क्या है भगवान श्रीकृष्ण और उनकी 16 हजार पत्नियों की कहानी! जानें पौराणिक कथा
नई दिल्ली। अक्सर ही लोग भगवान श्रीकृष्ण और उनकी 16,108 पत्नियों को कहानी को लेकर भ्रमित रहते हैं। आजकल लोग कई बार जाने वगैर ही इन संबंधों पर सवाल खड़े कर देते हैं। हालांकि सच बिल्कुल ही अलग है। श्री कृष्ण की 16,108 पत्नियों की कहानी कामुकता की नहीं, बल्कि नारी सम्मान और धर्म की रक्षा की है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, श्री कृष्ण की 8 मुख्य रानियां थीं और 16,100 अन्य रानियां थीं जिन्हें उन्होंने एक विशेष परिस्थिति में अपनाया था।
पौराणिक कथा
नरकासुर (जिसे भौमासुर भी कहा जाता है) एक शक्तिशाली और क्रूर राक्षस था। उसने पृथ्वी और स्वर्ग के कई राज्यों को जीतकर वहां की 16,100 राजकुमारियों और कन्याओं को बंदी बना लिया था। जब इन कन्याओं का कष्ट बढ़ गया, तब भगवान श्री कृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ मिलकर नरकासुर पर आक्रमण किया और उसका वध कर दिया। मुक्त होने के बाद इन कन्याओं के सामने एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई। उस समय के समाज और उनके परिवारों ने उन्हें स्वीकार करने से मना कर दिया क्योंकि वे एक राक्षस की कैद में रह चुकी थीं। उनके पास या तो आत्महत्या का रास्ता था या अपमानित जीवन जीने का। कन्याओं ने श्री कृष्ण से अपने सम्मान की रक्षा की गुहार लगाई। उनकी दयनीय स्थिति को देखते हुए, श्री कृष्ण ने उन सभी 16,100 कन्याओं से विवाह कर लिया ताकि उन्हें समाज में 'रानी' का दर्जा मिले और कोई उन पर उंगली न उठा सके।
श्री कृष्ण की मुख्य रानियां (अष्टभार्या)
श्री कृष्ण की 8 प्रमुख पत्नियां थीं, जिन्हें 'अष्टभार्या' कहा जाता है:
- रुक्मिणी (सबसे प्रमुख और देवी लक्ष्मी का अवतार)
- सत्यभामा
- जाम्बवती
- कालिंदी
- मित्रविन्दा
- नग्नजिती (सत्या)
- भद्रा
- लक्ष्मणा
प्रतीकात्मक अर्थ
जानकारी के मुताबिक कुछ विद्वान 16,000 रानियों को भारतीय संगीत के 16,000 रागों या मन की वृत्तियों का प्रतीक भी मानते हैं।