शकुनि की मृत्यु के बाद कहां गए उसके जादुई पासे! क्या कलियुग में है मौजूद, जानें रहस्य
नई दिल्ली। महाभारत के सबसे कुटिल पात्र शकुनि के पासों का रहस्य उनके जीवन के अंत के साथ ही एक रहस्य बन गया। लोककथाओं और कुछ पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इन पासों के गायब होने के पीछे कई रोचक कहानियां प्रचलित हैं।
कृष्ण की चेतावनी और अर्जुन द्वारा विसर्जन
एक लोकप्रिय मान्यता के अनुसार, युद्ध के बाद भगवान कृष्ण ने भीम से कहा था कि ये पासे विनाश की जड़ हैं। यदि ये किसी के हाथ लग गए, तो भविष्य में भी जुए के कारण नरसंहार होता रहेगा। इसके बाद अर्जुन ने उन पासों को एक विशाल नदी में फेंक दिया। हालांकि, कहा जाता है कि कृष्ण इस बात से चिंतित थे कि बहते हुए ये पासे किसी के हाथ लग सकते हैं और कलियुग में बर्बादी का कारण बन सकते हैं।
राख में तब्दील होना
कुछ लोककथाओं का मानना है कि शकुनि की मृत्यु के बाद वे जादुई पासे अपने आप जलकर राख हो गए और बाद में जल में विसर्जित हो गए।
द्वापर युग के साथ अंत
इतिहासकारों और शोधकर्ताओं का एक पक्ष यह भी है कि ये पासे शकुनि की भ्रम विद्या और मायाजाल का प्रतीक थे। द्वापर युग की समाप्ति के साथ ही ऐसी सभी मायावी वस्तुओं का अस्तित्व समाप्त हो गया।
कलियुग में मौजूदगी का भ्रम
कुछ कहानियाँ यह भी कहती हैं कि शकुनि आज भी सूक्ष्म रूप में मौजूद हैं और जुए व धोखे के रूप में लोगों की आत्माओं को अपने जाल में फंसाते हैं।
पासों का रहस्य क्या था?
मान्यता है कि ये पासे शकुनि के पिता राजा सुबल की हड्डियों (रीढ़ या जांघ की हड्डी) से बने थे। कहा जाता है कि उनमें उनके पिता की आत्मा का वास था, इसलिए वे हमेशा शकुनि की आज्ञा मानते थे। हालांकि, महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित मूल महाभारत में हड्डियों से बने पासों का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता; वहां इसे शकुनि की भ्रम विद्या और जुए में निपुणता बताया गया है।