कुंभकरण 6 महीने तक क्यों सोता था? ब्रह्मा जी से वरदान मांगते समय हो गई थी गलती, इंद्रासन के बदले मिला निद्रासन

Update: 2026-01-28 02:30 GMT

नई दिल्ली। रामायण में कई किस्से और कहानियां है। हालांकि जब-जब रावण के भाई कुंभकरण का नाम आता तो सबसे पहले उसकी लंबी नींद याद आती है। लेकिन क्या आप जानते है कि आखिर कुंभकरण को इतनी लंबी नींद क्यों आती थी? क्या यह उसकी इच्छा थी या इसके पीछे कोई गहरी चाल छिपी थी?

क्या है कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, कुंभकर्ण के 6 महीने तक सोने के पीछे भगवान इंद्र की एक सोची-समझी चाल और देवी सरस्वती का प्रभाव था। इसकी पूरी कहानी इस प्रकार है: कुंभकर्ण ने ब्रह्मा जी को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की थी। जब ब्रह्मा जी वरदान देने प्रकट हुए, तो देवराज इंद्र घबरा गए। उन्हें डर था कि कुंभकर्ण वरदान में उनका सिंहासन (इंद्रासन) न मांग ले, जिससे स्वर्ग पर राक्षसों का आधिपत्य हो जाता।

इंद्र ने देवी सरस्वती से मांगी थी सहायता

इंद्र ने देवी सरस्वती से सहायता मांगी। जब कुंभकर्ण वरदान मांगने लगा, तब माता सरस्वती उसकी जिह्वा (जीभ) पर विराजमान हो गईं। देवी सरस्वती के प्रभाव के कारण कुंभकर्ण की मति भ्रमित हो गई। वह मांगना तो 'इंद्रासन' चाहता था, लेकिन उसके मुख से 'निद्रासन' (सोने का वरदान) निकल गया। ब्रह्मा जी ने तुरंत 'तथास्तु' कह दिया।

वरदान की अवधि में संशोधन कर दिया गया

जब कुंभकर्ण और रावण को इस गलती का अहसास हुआ, तो रावण ने ब्रह्मा जी से वरदान वापस लेने की विनती की। ब्रह्मा जी ने वरदान तो वापस नहीं लिया, लेकिन उसकी अवधि में संशोधन कर दिया। इसके बाद कुंभकर्ण वर्ष में 6 महीने सोता और केवल एक दिन के लिए भोजन करने और जागने के लिए उठता था। एक अन्य मान्यता के अनुसार, वह 'निर्देवत्वम्' (देवताओं का विनाश) मांगना चाहता था, लेकिन सरस्वती के कारण उसके मुख से 'निद्रावत्वम्' (नींद) निकल गया। 

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