गुड़ी पड़वा का पर्व आज! भूलकर भी न करें ये काम वरना टूट पड़ेगा मुश्किलों का पहाड़, जानें क्या है इसका महत्व
नई दिल्ली। आज पूरा देश गुड़ी पड़वा हिंदू नव वर्ष का पर्व मना रहा है। मान्यता है कि इस दिन की गई गलतियां साल भर के लिए नकारात्मकता ला सकती हैं। देवी लक्ष्मी की कृपा बनाए रखने के लिए कुछ कार्यों से बचना चाहिए। मान्यता है कि इस दिन किए गए शुभ कार्य पूरे साल सुख-समृद्धि लाते हैं।
गुड़ी पड़वा पर क्या न करें
- इस पवित्र दिन पर मांस या शराब का सेवन पूरी तरह वर्जित माना जाता है।
- शास्त्रों के अनुसार, नव वर्ष के पहले दिन बाल, दाढ़ी-मूंछ कटवाना या नाखून काटना अशुभ होता है।
- मां लक्ष्मी वहीं वास करती हैं जहां सफाई और शांति हो। आज के दिन घर में कचरा न फैलाएं और किसी भी प्रकार के वाद-विवाद या झगड़े से बचें।
- गुड़ी पड़वा के दिन दोपहर में सोना आलस्य का प्रतीक माना जाता है, जिससे मां लक्ष्मी रुष्ट हो सकती हैं।
- विशेष रूप से महिलाओं और बुजुर्गों का अपमान न करें। अपशब्दों का प्रयोग करने से घर में दरिद्रता आती है।
- सूर्यास्त का समय वंदना का होता है, इस दौरान सोने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह रुक जाता है।
क्या करें इस दिन?
- घर के मुख्य द्वार पर गुड़ी (ध्वज) स्थापित करें।
- मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें।
- स्वास्थ्य और सकारात्मकता के लिए नीम और गुड़ का सेवन करें।
- नए कार्यों की शुरुआत करें।
गुड़ी पड़वा की कथा
ब्रह्मांड की रचना: पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि (ब्रह्मांड) का निर्माण किया था और सतयुग की शुरुआत हुई थी।
श्रीराम की विजय: रामायण काल की कथा के अनुसार, भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास काटकर और रावण पर विजय प्राप्त कर इसी दिन अयोध्या लौटे थे। उनके स्वागत में लोगों ने घरों के बाहर विजय पताका के रूप में 'गुड़ी' फहराई थी।
राजा शालिवाहन की विजय: एक अन्य कथा के अनुसार, राजा शालिवाहन ने मिट्टी के सैनिकों की सेना बनाकर शक्तिशाली शकों को पराजित किया था। इस महान विजय की स्मृति में भी यह पर्व मनाया जाता है।
छत्रपति शिवाजी महाराज: मराठा साम्राज्य में छत्रपति शिवाजी महाराज ने विदेशी आक्रमणकारियों पर अपनी विजय के उपलक्ष्य में गुड़ी फहराने की परंपरा को और सुदृढ़ किया था।
क्यों मनाया जाता है यह पर्व?
यह चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा को पड़ता है, जो हिंदू पंचांग का पहला दिन है। 'गुड़ी' का अर्थ है विजय पताका। यह अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव है। यह वसंत ऋतु के आगमन और रबी फसलों की कटाई का समय होता है।