भारतीय समाज में पति क्यों पत्नी को समझाता है अपनी 'जागीर', क्या इसके पीछे पुरुष की बचपन की परवरिश है या कुछ और...

Update: 2026-03-14 21:50 GMT

भारतीय समाज में पति द्वारा पत्नी को अपनी 'संपत्ति' या 'जागीर' समझने की मानसिकता के पीछे कई गहरे सामाजिक और ऐतिहासिक कारण हैं। हालांकि, आधुनिक शिक्षा और कानूनी जागरूकता (जैसे घरेलू हिंसा और संपत्ति के अधिकार) के कारण अब इस सोच में बदलाव आ रहा है।

पितृसत्तात्मक ढांचा (Patriarchy)

सदियों से समाज पुरुष प्रधान रहा है, जहां परिवार का मुखिया पुरुष होता है। इस व्यवस्था में महिलाओं को स्वतंत्र व्यक्ति के बजाय पुरुष के अधीन माना जाता रहा है।

आर्थिक निर्भरता

पारंपरिक रूप से संपत्ति और धन पर पुरुषों का नियंत्रण रहा है। पत्नी की आर्थिक जरूरतों के लिए पति पर निर्भरता उसे एक 'आश्रित' की श्रेणी में खड़ा कर देती है, जिससे मालिकाना हक का भाव पैदा होता है।

कन्‍यादान की परंपरा

शादी के दौरान 'कन्यादान' (बेटी का दान) जैसे रीति-रिवाजों का शाब्दिक और गलत अर्थ कई बार यह संदेश देता है कि स्त्री एक वस्तु है जिसे एक परिवार से दूसरे परिवार को सौंपा जा रहा है।

सामाजिक परवरिश

लड़कों को बचपन से ही 'रक्षक' और 'स्वामी' की भूमिका में देखा जाता है जबकि लड़कियों को 'समायोजन' करने की सीख दी जाती है। यही परवरिश बड़े होकर प्रभुत्व जमाने की मानसिकता बनती है।

असुरक्षा और नियंत्रण

कई बार पुरुष अपनी असुरक्षा को छिपाने के लिए पत्नी पर अत्यधिक नियंत्रण रखते हैं, ताकि समाज में उनकी 'मर्दानगी' और 'धौंस' बनी रहे।

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