ग्रहण से पहले सूतक क्यों लगता है? जानें सोना और पाठ-पूजा करना क्यों होता है वर्जित
नई दिल्ली। हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में ग्रहण को केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक अवसर माना जाता है। ग्रहण शुरू होने से पहले के समय को 'सूतक' कहा जाता है, जिसे एक प्रकार का 'अशुद्ध' समय माना जाता है। मगर क्या आप जानते है कि सूतक क्यों लगता है और इस दौरान किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
सूतक क्या है और क्यों लगता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के समय राहु और केतु द्वारा सूर्य या चंद्रमा को ग्रास करने (पीड़ा देने) की प्रक्रिया होती है। इस समय ब्रह्मांड में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ जाता है।
नकारात्मक ऊर्जा: माना जाता है कि ग्रहण के प्रभाव से वातावरण में हानिकारक तरंगे फैलती हैं, जिसका सीधा असर मनुष्य के स्वास्थ्य और मन पर पड़ता है।
अशुद्ध काल: सूतक को एक ऐसा समय माना जाता है जब प्रकृति संवेदनशील होती है, इसलिए इस दौरान शुभ कार्य वर्जित होते हैं ताकि उन पर ग्रहण का नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
सूतक का समय
सूतक काल ग्रहण की अवधि के आधार पर तय होता है।
सूर्य ग्रहण: सूर्य ग्रहण का सूतक ग्रहण शुरू होने से 12 घंटे पहले शुरू हो जाता है।
चंद्र ग्रहण: चंद्र ग्रहण का सूतक ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले शुरू होता है।
सूतक के दौरान जरूरी नियम
सूतक काल के दौरान कुछ नियमों का पालन करना लाभकारी माना जाता है:
1. भोजन और जल
सूतक शुरू होने के बाद भोजन पकाने और खाने से बचना चाहिए।
तुलसी का पत्ता: पहले से बने हुए भोजन, दूध और पीने के पानी में तुलसी के पत्ते (कुश) डाल देने चाहिए। मान्यता है कि तुलसी में शुद्धिकरण की शक्ति होती है जो नकारात्मक ऊर्जा को सोख लेती है।
2. पूजा-पाठ
सूतक के दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। मूर्तियों को स्पर्श करना वर्जित होता है।
इस समय मानसिक जाप (मन में भगवान का नाम लेना) सबसे उत्तम माना जाता है।
3. गर्भवती महिलाओं के लिए नियम
गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। उन्हें नुकीली चीजें (कैंची, चाकू, सुई) इस्तेमाल नहीं करनी चाहिए और घर के अंदर ही रहना चाहिए।
4. अन्य वर्जित कार्य
सूतक काल में सोना, संभोग करना, बाल काटना या नाखून काटना शुभ नहीं माना जाता।
ग्रहण समाप्त होने के बाद क्या करें?
- ग्रहण खत्म होते ही पूरे घर में गंगाजल छिड़कें और स्वयं भी स्नान करें।
- ग्रहण के बाद जरूरतमंदों को अनाज, काले तिल या वस्त्र दान करना बहुत फलदायी माना जाता है।
- सूतक के पहले का बना हुआ भोजन (जिसमें तुलसी न हो) नहीं खाना चाहिए, ताजा भोजन बनाकर ही ग्रहण करें।
एक विशेष बात
सूतक के नियम बीमार व्यक्तियों, वृद्धों और बच्चों पर कड़ाई से लागू नहीं होते। वे अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार नियमों का पालन कर सकते हैं।