आखिर यमुना को क्यों माना जाता है भगवान कृष्ण की पत्नी, जानें इसके पीछे की कहानी

Update: 2026-03-14 02:30 GMT

नई दिल्ली। सनातन धर्म में कई कहानी, जयंती की अपनी विशेष महत्वता है। बता दें कि चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। दरअसल इस दिन यमुना जयंती मनाई जाती है। इसे यमुना छठ भी कहा जाता है। यमुना को एक महत्वपूर्ण नदी माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यमुना जी भगवान श्री कृष्ण की आठ मुख्य पत्नियों (अष्टभार्या) में से चौथी पत्नी थीं। उन्हें कालिंदी के नाम से भी जाना जाता है और वे सूर्य देव (सूर्य नारायण) की पुत्री हैं।

चैत्र की छठ पर क्यों मनाई जाती है उनकी जयंती?

चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को यमुना छठ या यमुना जयंती के रूप में मनाने के कई कारण हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, चैत्र माह की षष्ठी तिथि को ही देवी यमुना का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। इसीलिए इस दिन को उनके जन्मोत्सव या जयंती के रूप में मनाया जाता है। चूंकि यमुना जी श्री कृष्ण की पटरानी और सहचरी मानी जाती हैं, इसलिए ब्रज, मथुरा और वृंदावन में उनके भक्त इस दिन को बहुत उत्साह से मनाते हैं। इस दिन भगवान कृष्ण की भी विशेष पूजा की जाती है।

क्या है पौराणिक कथा? 

पौराणिक कथा के अनुसार, यमुना माता को भगवान विष्णु से प्रेम था। यमुना माता ने श्री हरि विष्णु को प्राप्त करने के लिए कई जन्मों तक तप किया, लेकिन भगवान उनको नहीं मिल सके। फिर भी उन्होंने कठिन तप जारी रखा। अंततः भगवान विष्णु यमुना माता की तपस्या से प्रसन्न हुए और यमुना माता को वरदान दिया कि द्वापर युग में जब वो कृष्ण अवतार में धरती पर आएंगे, तब वो उनको प्राप्त होंगे।

एक बार द्वापर युग में जब श्रीकृष्ण और अर्जुन वन में घूम रहे थे। तभी श्रीकृष्ण को प्यास लगी और वे पानी की तलाश में अर्जुन के साथ आगे निकल गए। वो जितना आगे बढ़े उनको शितलता की अनुभूति हुई। जब कृष्ण कुछ और आगे बढ़े तो उन्हें एक अति सुंदर स्त्री विष्णुजी के ध्यान में लीन नजर आई। श्रीकृष्ण के परिचय पूछने पर उन्होंने बताया कि वो यमुना हैं और उनकी इच्छा है कि वो विष्णु जी को प्राप्त करें।

यमुना माता ने कहा कि इसलिए वो वर्षों से तपस्या कर रही हैं। यही नहीं उन्होंने श्रीकृष्ण से कहा कि द्वापर युग में विष्णु अगर उनको वर के रूप में नहीं मिले तो वो सदा तपस्या करती रहेंगी। यमुना माता की बात सुनकर श्रीकृष्ण ने उन्हें अपना परिचय दिया और बताया कि वहीं विष्णु के अवतार हैं. इसके बाद उन्होंने यमुना माता से विवाह कर लिया।

नवरात्रि का विशेष दिन

यह त्योहार चैत्र नवरात्रि के छठे दिन आता है। मान्यता है कि इस दिन यमुना नदी में स्नान करने से आत्मा की शुद्धि होती है और पापों से मुक्ति मिलती है। 2026 में, उदया तिथि के अनुसार यमुना जयंती 24 मार्च को मनाई जाएगी। इस दिन भक्त सूर्योदय से पहले यमुना नदी में स्नान करते हैं और व्रत रखते हैं।

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