बिरयानी के एक बिल ने खोला 70 हजार करोड़ के घोटाले का राज, AI ने इस तरह की मदद...

केवल आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के 3,734 PAN की जांच में 5,000 करोड़ रुपये से अधिक की दबाई गई बिक्री का खुलासा हुआ

Update: 2026-02-20 12:30 GMT

हैदराबाद। डिजिटल के युग में धोखाधड़ी करना आसान नहीं है। कोई इंसान कितना भी चालाक क्यों न हो, सिस्टम के द्वारा छोटी गलती भी पकड़ में आ ही जाती है। ऐसा ही मामला बिरयानी के कुछ गायब बिलों का हुआ। दरअसल उन गायब बिलों से देश में लगभग 70,000 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी का खुलासा हो गया। 2019 से 1.77 लाख रेस्टुरेंट के बिलिंग डेटा की जांच में पाया गया कि औसतन 27% बिक्री को नहीं दिखाया जा रहा था। यानी कुल मिलाकर 70,000 करोड़ रुपये का टर्नओवर छिपा लिया गया, जिससे अरबों डॉलर के टैक्स नुकसान होने की आशंका है। बता दें कि मामला तब सामने आया जब हैदराबाद में आयकर विभाग के अधिकारी एक रेस्टुरेंट में नियमित जांच के लिए पहुंचे।

इन राज्यों में बड़े स्तर पर अनियमितताएं पाई गईं

कर्नाटक ने लगभग 2,000 करोड़ रुपये के डिलीट लेन-देन तेलंगाना ने करीब 1,500 करोड़ रुपये तमिलनाडु, महाराष्ट्र और गुजरात में भी बड़े स्तर पर अनियमितताएं पाई गईं। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के 3,734 PAN की जांच में 5,000 करोड़ रुपये से अधिक की दबाई गई बिक्री का खुलासा हुआ। केवल 40 रेस्टुरेंट के नमूने में ही करीब 400 करोड़ रुपये का बिना घोषित टर्नओवर मिला। कुछ जगहों पर लगभग 25% बिक्री छिपाई गई थी।

CBDT ने जांच का दायरा बढ़ाया

इसके बाद केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने जांच का दायरा अन्य राज्यों तक बढ़ा दिया। अब विभाग पुनर्निर्मित बिलों का मिलान टैक्स रिटर्न और बैंक रिकॉर्ड से कर रहा है और जल्द ही नोटिस और जुर्माने की कार्रवाई शुरू हो सकती है।

ये है पूरा मामला

जानकारी के मुताबिक, यह मामला हैदराबाद में आयकर विभाग के अधिकारी के रेस्टुरेंट में नियमित जांच के दौरान सामने आया, यह कोई छापेमारी नहीं। काउंटर पर बिलिंग जारी थी और ग्राहक सामान्य रूप से भोजन कर रहे थे। लेकिन अधिकारियों ने देखा कि रेस्टुरेंट में मौजूद ग्राहकों की संख्या और बिलिंग सिस्टम में दर्ज बिलों की संख्या मेल नहीं खा रही थी। कुछ नकद बिल सिस्टम में थोड़ी देर के लिए दिखाई देते और फिर गायब हो जाते थे। प्रिंटेड बिल सारे ठीक लग रहे थे, लेकिन सॉफ्टवेयर लॉग अलग कहानी बयां कर रहे थे। इससे पता चलता है कि यह सुनियोजित हेराफेरी थी। बिलिंग सॉफ्टवेयर से खुला बड़ा खेल शुरुआत में इसे स्थानीय स्तर की गड़बड़ी माना गया, लेकिन जांच में पता चला कि कई रेस्टुरेंट एक ही बिलिंग सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर रहे थे।

सॉफ्टवेयर प्रदाता के बैकएंड तक जांच हुई

जब सॉफ्टवेयर प्रदाता के अहमदाबाद स्थित बैकएंड तक जांच पहुंची, तो देशभर के एक लाख से अधिक रेस्टुरेंट का करीब 60 टेराबाइट डेटा सामने आया। हैदराबाद की डिजिटल लैब में विशेषज्ञों ने डिलीट किए गए बिलों को दोबारा जोड़ना शुरू किया। हर लेन-देन ने सिस्टम में एक डिजिटल ट्रेल छोड़ा था, जिसे पूरी तरह मिटाया नहीं जा सका।

AI ने इस तरह से की मदद

AI टूल्स की मदद से डिलीट किए गए बिलों को फिर से रिकवर किया गया। जांच में सामने आया कि छह सालों में रेस्टुरेंट ने लगभग 2.43 लाख करोड़ रुपये के बिल जनरेट किए थे। इनमें से 13,000 करोड़ रुपये से अधिक के बिल रिकॉर्ड होने के बाद मिटा दिए गए थे।


Tags:    

Similar News