यूपी बोर्ड की परीक्षा के महज दो दिन में 3.4 लाख से अधिक छात्र रहे अनुपस्थित, जानें कारण

यूपी बोर्ड 10वीं और 12वीं के एग्जाम के लिए कुल 53,37,778 स्टूडेंट्स ने रजिस्ट्रेशन कराया था

Update: 2026-02-20 13:00 GMT

लखनऊ। यूपी माध्यमिक शिक्षा बोर्ड 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा की शुरुआत 18 फरवरी से शुरू हो चुकी है। जिसके तहत बोर्ड एग्जाम के लिए 53 लाख से अधिक छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, लेकिन बोर्ड एग्जाम शुरू होने के महज दो दिन के भीतर ही 3.4 लाख से अधिक छात्रों ने एग्जाम छोड़ दिए हैं। इसके बाद से यूपी बोर्ड एग्जाम 2026 की चर्चा हर तरफ हो रही है। इतनी बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स की तरफ से बोर्ड एग्जाम छोड़ने के मामले को लेकर कई तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं।

10वीं-12वीं बोर्ड एग्जाम के लिए इतने छात्रों ने कराया रजिस्ट्रेशन

यूपी बोर्ड 10वीं और 12वीं के एग्जाम के लिए कुल 53,37,778 स्टूडेंट्स ने रजिस्ट्रेशन कराया था। इसमें से 10वीं बोर्ड एग्जाम के लिए 27,61,696 एवं 12वीं बोर्ड एग्जाम के लिए 25,76,082 स्टूडेंट्स ने रजिस्ट्रेशन कराया था। बोर्ड एग्जाम शुरू होने के दो दिन बाद तक एग्जाम छोड़ने वाले स्टूडेंट्स की संख्या 3,40760 तक पहुंच गई।

8 हजार से अधिक सेंटर बनाए गए

यूपी बोर्ड एग्जाम को बिना नकल के पारदर्शी और सुव्यवस्थित ढंग से सम्पन्न कराने के लिए प्रदेश में कुल 8033 परीक्षा केन्द्र बनाए गए हैं। जिनमें 596 राजकीय, 3453 अशासकीय सहायता प्राप्त और 3984 स्ववित्त पोषित विद्यालय शामिल हैं।

18 जिलों को किया गया संवदेनशील घोषित

दूसरी ओर नकलविहीन बोर्ड एग्जाम आयोजित करने के लिए प्रदेश के 18 जिलों को संवदेनशील घोषित किया गया है। वहीं 222 परीक्षा केन्द्रों को अति संवेदनशील और 683 को संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। इन केन्द्रों पर एसटीएफ और स्थानीय अभिसूचना इकाई को पूरी परीक्षा अवधि में सक्रिय रखा जाएगा तथा अति संवेदनशील केन्द्रों का दिन में दो बार निरीक्षण सुनिश्चित किया गया है।

निगरानी के लिए लगाए गए वॉयस रिकॉर्डरयुक्त सीसीटीवी

परीक्षा की निगरानी के लिए प्रत्येक परीक्षा कक्ष में वॉयस रिकॉर्डरयुक्त दो सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनके साथ राउटर, डीवीआर और हाई-स्पीड इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। परीक्षा केन्द्रों पर बनाए गए स्ट्रांग रूम 24×7 सीसीटीवी निगरानी में रहेंगे।

नकल करने वाले छात्रों पर सख्त पहरा

ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि बोर्ड एग्जाम में नकल पर सख्त पहरे होने के कारण बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स बोर्ड एग्जाम में शामिल ही नहीं हुए हैं।


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