नक्सलवाद पर संसद में अमित शाह बोले, नक्सली हथियार डाले सरकार उनकी मदद करेगी, यह कहकर वामपंथी विचारधारा को कोसा
अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने नक्सलवाद की समस्या को गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी क्षेत्रों में विकास नहीं पहुंचाया गया
नई दिल्ली। नक्सल मुक्त भारत पर आज यानी सोमवार लोकसभा में चर्चा के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि देश लंबे समय से पीड़ित रहा है। उन्होंने कहा कि पीएम के नेतृत्व में देश नक्सलवाद मुक्त हो रहा है। इस दौरान उन्होंने नक्सलवाद के मुद्दे पर विपक्ष को जमकर फटकार लगाई।
आदिवासियों को लंबे समय से मौका नहीं मिला
लोकसभा में नक्सलवाद पर चर्चा के दौरान अमित शाह ने कहा कि रेड कॉरिडोर के 12 राज्यों और आदिवासी समाज की ओर से वह इस बहस के लिए धन्यवाद देते हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी वर्षों से चाहते थे कि उनकी स्थिति संसद में उठे और दुनिया जाने, लेकिन लंबे समय तक उन्हें यह मौका नहीं मिला। अब उनकी आवाज राष्ट्रीय मंच पर पहुंची है। आदिवासी विधायकों और सांसदों से पूछना चाहता हूं। आपने तो अपना विकास कर लिया। लेकिन आदिवासी जनता का आपने कितना विकास किया।
नक्सली अपनों का भी खून बहाते हैं
उन्होंने कहा कि देश के 12 राज्य नक्सलवाद से परेशान थे। 1970 के दशक में नक्सलवाद की शुरूआत हुई। कुछ लोग शहीदों की तुलना नक्सलियों से करते हैं। वामपंथी विचारधारा से देश में आतंकवाद फैला। भोले-भाले आदिवासियों को बहलाकर उनके हाथों में हथियार रख देते थे। जनता का साथ मिलने से नक्सलवाद खत्म हुआ। नक्सलवाद में सत्ता बंदूक से मिलती है। हमारी सरकार डरने वाली नहीं है। कोई भी काम संविधान के हिसाब से होना चाहिए।
पीएम मोदी के शासन में हुए बड़े काम
प्रधानमंत्री मनमोहन ने स्वीकारा था कि देश की आंतरिक सुरक्षा की सबसे बड़ी समस्या हथियारी माओवादी है। मगर कुछ नहीं किया गया। 2014 में परिवर्तन हुआ। मोदी जी के शासन के अंदर कई समस्याओं का समाधान हुआ। धारा 370 हट गई, 35ए हट गई, राम जन्मभूमि का मंदिर बन गया। जीएसटी इस देश में वास्तविकता बन गई। विधाई मंडल में मातृ शक्ति को 33 प्रतिशत का आरक्षण दिया गया। कई सारे बड़े काम जो आजादी से इस देश की जनता चाहती थी। वो सारे बड़े काम पीएम मोदी के शासन में हुए।
कांग्रेस पर लगाए यह आरोप
अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने नक्सलवाद की समस्या को गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी क्षेत्रों में विकास नहीं पहुंचाया गया, जिससे वहां असंतोष बढ़ा। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों की कमजोरी के कारण ही नक्सलवाद ने जड़ें मजबूत कीं।