बसंत पंचमी: सरस्वती पूजा, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि, मंत्र, और भोग

Update: 2026-01-23 01:30 GMT

नई दिल्ली। आज पूरे देश में बसंत पंचमी का पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन को कहीं श्री पंचमी तो कहीं सरस्वती पूजा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन घरों और मंदिरों में ही नहीं बल्कि स्कूलों में भी मां सरस्वती की पूजा होती है। इस दिन मां सरस्वती की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त, विधि और मंत्र महत्वपूर्ण हैं।

सरस्वती पूजा शुभ मुहूर्त 2026

पूजा का समय: सुबह 07:13 से दोपहर 12:33 तक (सबसे श्रेष्ठ समय)।

विस्तारित मुहूर्त: कुछ गणनाओं के अनुसार यह सुबह 07:15 से दोपहर 12:50 तक भी रहेगा।

अमृत काल: सुबह 08:45 से 10:20 तक।

पंचमी तिथि: 23 जनवरी को तड़के 02:28 AM पर शुरू होकर 24 जनवरी को रात 01:46 AM पर समाप्त होगी।

पूजा विधि

- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पीले रंग के वस्त्र धारण करें।

- पूजा स्थान को साफ कर मां सरस्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।

- मां को सफेद चंदन, पीले फूल (गेंदा या सरसों), हल्दी, अक्षत और रोली अर्पित करें।

- विद्यार्थी अपनी किताबें, पेन और कलाकार अपने वाद्य यंत्र मां के चरणों में रखकर आशीर्वाद लें।

- अंत में दीप जलाकर मां सरस्वती की आरती करें और परिवार में प्रसाद बांटें।

बसंत पंचमी पर गजकेसरी योग

बसंत पंचमी के दिन चंद्रमा मीन राशि में प्रवेश करेंगे. साथ ही इस दिन चंद्रमा से चतुर्थ भाव में गुरु के होने से गजकेसरी का शुभ संयोग भी बन रहा है। गजकेसरी योग ज्योतिष में एक अत्यंत शुभ और शक्तिशाली योग है। इससे व्यक्ति को धन, समृद्धि, उच्च बुद्धि, समाज में मान-सम्मान, नेतृत्व क्षमता और करियर में सफलता मिलती है।

प्रमुख मंत्र

पूजा के दौरान इन मंत्रों का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

मूल मंत्र: ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः॥

विद्या प्राप्ति हेतु: ॐ ऐं ह्रीं श्रीं वाग्देव्यै सरस्वत्यै नमः।

सरस्वती गायत्री: ॐ ऐं वाग्देव्यै विद्महे धीमहि। तन्नो देवी प्रचोदयात्।।

भोग (प्रसाद)

 मां सरस्वती को पीले रंग का भोग अत्यंत प्रिय है। आप केसरिया भात (पीले चावल), बूंदी के लड्डू या पीली मिठाई चढ़ा सकते हैं। केसर की खीर, मालपुआ, सफेद मिश्री और दही का भोग भी लगाया जाता है। मौसमी फल जैसे बेर, केला और हरे रंग के फल अर्पित करना शुभ रहता है। 

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