Holashtak: कल से शुरू होलाष्टक, जानें इन 8 दिनों में क्या करना चाहिए और क्या नहीं

‘होलाष्टक’ शब्द दो भागों से मिलकर बना है, ‘होला’ अर्थात होली और ‘अष्टक’ यानी आठ। इस तरह होली से पहले के आठ दिनों को होलाष्टक कहा जाता है

Update: 2026-02-23 10:50 GMT

नई दिल्ली। सनातन परंपरा में फाल्गुन मास के शुक्लपक्ष की अष्टमी तिथि से लेकर पूर्णिमा तिथि के 8 दिनों को होलाष्टक के रूप में जाना जाता है। इस बार फाल्गुन शुक्ल पक्ष की सप्तमी 24 फरवरी यानी मंगलवार को सुबह 7:01 बजे तक रहेगी। इसके बाद फाल्गुन शुक्ल पक्ष अष्टमी तिथि प्रारंभ होते ही होलाष्टक की शुरुआत हो जाएगी। परंपराओं के मुताबिक, होलाष्टक से लेकर होलिका दहन तक किसी भी प्रकार के शुभ या मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं। हालांकि इस संबंध में अलग-अलग धारणाएं प्रचलित हैं। कुछ विद्वान इसका कारण मौसमी व सामाजिक बताते हैं। आइए जानते हैं कि होली से पहले आने वाले ये 8 दिन अशुभ क्यों माने जाते हैं।  हमें क्या करना एवं क्या नहीं करना चाहिए।

होलाष्टक का अर्थ

धर्मशास्त्रों के मुताबिक, फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से होलिका दहन तक के आठ दिनों को ‘होलाष्टक’ कहा जाता है। ज्योतिष के अनुसार, इन आठ दिनों में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण जैसे मांगलिक कार्यों से परहेज करना चाहिए।

होला और अष्टक मिलाकर बना है होलाष्टक

दरअसल ‘होलाष्टक’ शब्द दो भागों से मिलकर बना है, ‘होला’ अर्थात होली और ‘अष्टक’ यानी आठ। इस तरह होली से पहले के आठ दिनों को होलाष्टक कहा जाता है।

इन दिनों में भगवान नारायण की करें पूजा

हिंदू मान्यता के अनुसार होलाष्टक के 8 दिनों में जगत के पालनहार माने जाने वाले भगवान श्री विष्णु की विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए। ऐसी मान्यता है जिस प्रकार भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रह्लाद के सभी संकटों को दूर किया था, उसी प्रकार श्रद्धा के साथ पूजा करने पर आपके कष्ट दूर हो जाएंगे। यदि आप आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं तो आपको होलाष्टक के आठ दिनों में भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की आराधना करनी चाहिए। होलाष्टक में होलिका दहन वाले दिन शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से उसकी पूजा करनी चाहिए। ऐसी मान्यता है कि होलिका पूजन करने पर जीवन की सारी व्याधियां, नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं और सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है। अगर आप शिव उपासक हैं और किसी रोग-दोष की वजह से परेशान चल रहे हैं तो होलाष्टक के दौरान महादेव की विशेष साधना पूरे आठ दिनों में करें। इस दौरान रुद्राष्टकं का पाठ और महामृत्युंजय मंत्र का जप करना चाहिए।

होलाष्टक में वर्जित कार्य

हिंदू मान्यता के अनुसार होलाष्टक के दिनों में किसी को भी मांगलिक कार्य जैसे - शादी, सगाई, तिलक, मुंडन, गृह प्रवेश, जनेऊ, आदि नहीं करना चाहिए। इसी तरह से होलाष्टक के दौरान व्यक्ति को दुर्भाग्य से बचने के लिए भूलकर भी बाल या नाखून नहीं काटना चाहिए। होलाष्ट के दौरान किसी के साथ झगड़ा न करें। होलाष्टक के दौरान भूलकर भी तामसिक चीजों जैसे मांस-मदिरा का सेवन से परहेज करें।

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