Israel Iran War: खामेनेई की मौत के बाद बाराबंकी के किंतूर गांव में पसरा मातम! जानें क्या है कारण

ईरान और इजरायल के बीच भीषण टकराव हो रहा है, जो कि अब युद्ध का रूप लेता नजर आ रहा है

Update: 2026-03-01 09:30 GMT

लखनऊ। इजरायली हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर से पूरी दुनिया हिल गई है। ईरान और इजरायल के बीच भीषण टकराव हो रहा है, जो कि अब युद्ध का रूप लेता नजर आने लगा है। इस घटना को लेकर केवल अंतरराष्ट्रीय सियासी में हलचल नहीं हो रही, बल्कि उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले का एक छोटा सा गांव किंतूर भी शोक की लहर में डूब गया है।

गांव में पसरा सन्नाटा

दरअसल खामेनेई का पैतृक जुड़ाव इसी गांव की मिट्टी थी। इस वजह से यहां सन्नाटा पसरा है। यहां के ग्रामीण अपने रक्त संबंधी की इस दुखद घटना से स्तब्ध हैं। क्योंकि इसी गांव की गलियों से निकलकर उनके पूर्वजों ने ईरान के सर्वोच्च सिंहासन तक का सफर तय किया था।

खामेनेई की जड़ें किंतूर गांव से जुड़ी थीं

जानकारी के मुताबिक, ईरान के सबसे शक्तिशाली व्यक्तित्व अयातुल्लाह खामेनेई की जड़ें किंतूर गांव के ‘हिंदी’ परिवार से जुड़ी थीं। उनके दादा सैयद अहमद मुसावी हिंदी 19वीं सदी की शुरुआत तक इसी गांव में निवास करते थे। लेकिन बाद में वह ईरान जाकर बस गए। अपनी भारतीय पहचान को जीवित रखने के लिए उनके परिवार ने गर्व के साथ अपने नाम में ‘हिंदी’ उपनाम जोड़ा था। जैसे ही इजरायली बमबारी और मिसाइल हमले में खामेनेई के मारे जाने की सूचना मिली, तो किंतूर गांव के लोग उदास हो गए। किंतूर के बुजुर्ग आज भी उन दस्तावेजों और यादों को सहेजे हुए हैं, जो उन्हें ईरान के इस ताकतवर नेतृत्व से जोड़े हुए थी।

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