महाशिवरात्रि आज! जानें क्या है शुभ मुहूर्त और किस तरह करें भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती की पूजा

Update: 2026-02-15 00:30 GMT

नई दिल्ली। आज भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती का दिन है। महाशिवरात्रि की पूजा विधि सरल और भक्तिपूर्ण है। वर्ष 2026 में महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी। इस दिन महादेव और माता पार्वती की पूजा का विशेष महत्व है।

पूजा की मुख्य विधि और चरण नीचे दिए गए हैं:

1. पूजन सामग्री 

अभिषेक के लिए: गंगाजल, शुद्ध जल, कच्चा दूध, दही, घी, शहद और शक्कर (पंचामृत)।

अर्पण के लिए: बेलपत्र (तीन पत्तियों वाला), धतूरा, भांग, शमी के पत्ते, सफेद फूल, फल (विशेषकर बेर), और अक्षत (बिना टूटे चावल)。

श्रृंगार के लिए: चंदन (सफेद या पीला), भस्म, इत्र, कलावा (मौली), और माता पार्वती के लिए सुहाग का सामान।

2. सुबह की तैयारी और संकल्प

सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और साफ (अधिमानतः पीले या सफेद) कपड़े पहनें।

हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर भगवान शिव के सामने व्रत और पूजा का संकल्प लें।

3. शिवलिंग का अभिषेक 

अभिषेक को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे इस क्रम में करें:

जल/गंगाजल: सबसे पहले शुद्ध जल अर्पित करें।

पंचामृत: दूध, दही, शहद, घी और शक्कर को मिलाकर या बारी-बारी से चढ़ाएं।

शुद्ध जल: अंत में दोबारा शुद्ध जल से स्नान कराएं।

4. पूजन और अर्पण

शिवलिंग पर चंदन का तिलक लगाएं और भस्म अर्पित करें。

बेलपत्र अर्पित करते समय ध्यान रखें कि चिकना हिस्सा शिवलिंग की ओर हो।

धतूरा, भांग, फूल और फल चढ़ाएं।

धूप और दीप प्रज्वलित करें।

5. मंत्र जाप और आरती

पूजा के दौरान 'ॐ नमः शिवाय' या 'महामृत्युंजय मंत्र' का निरंतर जाप करें।

शिव चालीसा का पाठ करें और अंत में कपूर से भगवान शिव की आरती करें。

6. रात्रि पूजा

महाशिवरात्रि पर रात के चारों प्रहरों में पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

प्रथम प्रहर: शाम 6:00 से रात 9:00 के बीच (दूध से अभिषेक)।

द्वितीय प्रहर: रात 9:00 से 12:00 के बीच (दही से अभिषेक)।

तृतीय प्रहर: रात 12:00 से 3:00 के बीच (घी से अभिषेक)।

चतुर्थ प्रहर: सुबह 3:00 से 6:00 के बीच (शहद से अभिषेक)

विशेष सलाह: यदि आप मंदिर नहीं जा सकते, तो घर पर मिट्टी का पार्थिव शिवलिंग बनाकर पूजा करना शास्त्रों में सर्वश्रेष्ठ बताया गया है।

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