Modi-Jinping Meet : ड्रैगन और हाथी हुए साथ... पीएम मोदी ने शी जिनपिंग को दोस्ती की बताई राह, जानें द्विपक्षीय बैठक में और क्या हुआ

Update: 2025-08-31 08:52 GMT

नई दिल्ली। पीएम मोदी 2 दिवसीय चीन यात्रा पर पहुंचे हैं। चीन में पीएम मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन से अलग द्विपक्षीय बैठक हुई है। इस दौरान पीएम मोदी ने जिनपिंग को दोस्ती का रास्ता बताया, जबकि चीनी राष्ट्रपति ने दोनों देशों की ताकत में एकता की बात की है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग से कहा-

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीनी राष्ट्रपति से कहा कि भारत और चीन आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर संबंधों को मज़बूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने सीमावर्ती क्षेत्रों में शांतिपूर्ण माहौल की भी सराहना की, जो कि पूर्वी लद्दाख में देपसांग और डेमचोक के दो टकराव बिंदुओं पर सैनिकों की वापसी के बाद बनाया गया है।

आपसी रिश्तों को आगे ले जाने के लिए प्रतिबद्धता

पीएम मोदी ने आगे कहा कि हम आपसी रिश्तों को आगे ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। पिछले साल कज़ान में हमारे बीच बहुत सार्थक बातचीत हुई थी, जिसने हमारे रिश्तों को एक सकारात्मक दिशा दी है। सीमा पर टकराव से पीछे हटने के बाद शांति और स्थिरता का माहौल बना गया है।

मानसरोवर यात्रा की शुरुआत

इस दौरान पीएम मोदी ने मानसरोवर यात्रा को लेकर जिनपिंग से कहा, कि हमारे विशेष प्रतिनिधियों के बीच सीमा प्रबंधन को लेकर एक समझौता हुआ है। कैलाश मानसरोवर यात्रा की शुरूआत फिर से हो गई है। दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें भी दोबारा शुरू की जा रही हैं। हमारे सहयोग से दोनों देशों के 2.8 अरब लोगों के हित जुड़े हुए हैं। हमलोग मानवता के कल्याण के लिए मिलकर काम करेंगे।

ड्रैगन और हाथी का साथ आना बेहद आवश्यक

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बैठक में कहा कि प्रधानमंत्री महोदय, आपसे फिर से मिलकर खुशी हो रही है। पिछली साल कजान में हमारी बैठक सफल हुई थी। दुनिया एक बड़े परिवर्तन की ओर बढ़ रही है। हम दोनों सबसे अधिक जनसंख्या वाले देश हैं। अच्छे पड़ोसी बनना एवं ड्रैगन और हाथी का साथ आना महत्वपूर्ण है।

चीन और भारत दो सबसे प्राचीन सभ्यताएं हैं

इसके साथ ही जिनपिंग ने कहा कि चीन और भारत दो सबसे प्राचीन सभ्यताएं हैं। इस साल चीन-भारत कूटनीतिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ है। दोनों देशों को अपने संबंधों को एक रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से संभालने की आवश्यकता है। हमें बहुपक्षवाद, बहुध्रुवीय विश्व और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने की अपनी ऐतिहासिक जिम्मेदारियों को भी निभाना होगा।

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