Trump Tariff War: 'भारत का कुछ नहीं बिगड़ेगा...' ट्रंप के 10 से 15% टैरिफ बढ़ाने पर एक्सपर्ट ने समझाए गणितीय आंकड़े

फंड मैनेजर समीर अरोड़ा ने कहा कि दिक्कत तब होती है, जब देशों पर अलग-अलग टैरिफ लगाया जाता

Update: 2026-02-22 13:41 GMT

नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ को 10 से बढ़ाकर 15% कर दिया है। अब इसको लेकर भारत पर  पड़ने वाले असर को लेकर अनुमान लगाया जा रहा है। इसी कड़ी में फंड मैनेजर समीर अरोड़ा ने ट्रंप की ओर से ग्लोबल टैरिफ बढ़ाने और इसके असर को लेकर एक पोस्ट साझा किया है। उन्होंने कहा कि इससे भारत पर किसी तरह का असर नहीं पड़ेगा। उनके मुताबिक वॉशिंगटन में राजनीतिक और कानूनी ड्रामे के बाद भी भारत की स्थिति लगभग पहले की तरह ही है।

यूएस की सुप्रीम कोर्ट ने  ग्लोबल टैरिफ आदेश को किया था रद्द

20 फरवरी को यूएस की सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 से फैसला सुनाते हुए, राष्ट्रपति के ग्लोबल टैरिफ आदेश को रद्द कर दिया था।  इसे कोर्ट ने एकतरफा बताया था. इसके बाद ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि उनका प्रशासन टैरिफ लगाने के लिए नए कानूनी रास्ते अपनाएगा. इसमें फेडरल कानून के वे सेक्शन भी शामिल हैं, जिनके लिए कॉमर्स विभाग द्वारा जांच की जरूरत है.

हेलिओस कैपिटल के फाउंडर समीर अरोड़ा का बयान

हेलिओस कैपिटल के फाउंडर समीर अरोड़ा ने तर्क देकर समझाया है कि इस कदम से भारत को सिर्फ नुकसान नहीं हुआ है। उन्होंने अपने पोस्ट में आठ पॉइंट में जिक्र कर बताया कि भारत के लिए 15 प्रतिशत में कुछ भी गलत नही है। उन्होंने बताया कि 90 से ज्यादा देश जो पहले 10% टैरिफ के दायरे में थे, अब 15% पर हैं। इसमें ऑस्ट्रेलिया, यूके, सिंगापुर और यूएई जैसे अमेरिका के व्यापारिक साझेदार देश हैं।

यूएस के अंदरूनी टैक्स से जुड़ा मामला

उन्होंने कहा कि दिक्कत तब होती है, जब देशों पर अलग-अलग टैरिफ लगाया जाता। लेकिन अगर सभी देशों पर एक जैसा टैरिफ लगाया जाता है, तो इससे क्या फर्क पड़ता है। यह यूएस के अंदरूनी टैक्स से जुड़ा मामला है। अरोड़ा ने कहा कि पहले का 10 प्रतिशत बेहद ही हैरान करने वाला था। उस फ्रेमवर्क के तहत ज्यादा से ज्यादा अलाउड लिमिट 15 परसेंट था। 

नए तरीके से टैरिफ कानून बनाकर जारी किए जाएंगे

दूसरी ओर अमेरिका के राष्ट्रपति ने कहा है कि अगले कुछ महीनों में उनका प्रशासन नए टैरिफ कानून बनाकर जारी करेगा। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को भी गलत बताया है। इसके साथ ही दूसरे कानूनी नियम के तहत टैरिफ लगाने की बात अमेरिकी राष्ट्रपति की तरफ से की गई है।

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