नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि को नमन! जानें प्रिय भोग, मंत्र और कथा
नई दिल्ली। नवरात्र का पावन अवसर चल रहा है। चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन मां दुर्गा के अत्यंत शक्तिशाली और उग्र स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। मां का यह रूप अंधकार और नकारात्मक शक्तियों का नाश करने वाला है, जिसके कारण इन्हें शुभंकरी भी कहा जाता है।
प्रिय भोग
- मां कालरात्रि को गुड़ का भोग अत्यंत प्रिय है।
- सप्तमी के दिन मां को गुड़ या गुड़ से बनी मिठाइयां जैसे मालपुआ अर्पित करना शुभ माना जाता है।
- मान्यता है कि मां को गुड़ का भोग लगाने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है और घर में सुख-समृद्धि आती है।
महत्वपूर्ण मंत्र
मां कालरात्रि की कृपा पाने के लिए इन मंत्रों का जाप किया जा सकता है:
- बीज मंत्र: ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥
ध्यान मंत्र:
या देवी सर्वभूतेषु मां कालरात्रि रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
अन्य मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै ॐ कालरात्रि दैव्ये नम:।
पौराणिक कथा
देवी महात्म्य के अनुसार, जब असुर शुंभ और निशुंभ ने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया, तब देवताओं की प्रार्थना पर मां पार्वती के माथे से एक अत्यंत कृष्ण वर्ण वाली देवी प्रकट हुईं, जिन्हें कालरात्रि कहा गया। असुर सेनापति रक्तबीज को वरदान था कि उसके रक्त की एक बूंद जमीन पर गिरने से उसी के समान दूसरा राक्षस पैदा हो जाएगा। मां कालरात्रि ने अपनी जिह्वा को फैलाकर रक्तबीज का वध किया और उसके रक्त की एक भी बूंद जमीन पर गिरने से पहले ही पी ली, जिससे उसका अंत संभव हुआ।
पूजा विधि के नियम
- मां को लाल गुड़हल और गुलाब के फूल विशेष रूप से प्रिय हैं।
- पूजा के लिए नीला या लाल रंग का उपयोग करना उत्तम माना जाता है।
- मां की पूजा में घी का दीपक जलाएं और Durga Chalisa का पाठ करें।