धर्मनिरपेक्षता का भी प्रतीक है सालासर बालाजी मंदिर! जानें इतिहास और मंदिर से जुड़े पौराणिक कथा
सालासर बालाजी मंदिर, राजस्थान के चुरू जिले में स्थित, हनुमान जी के भक्तों का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है, जो पूरे भारत में दाढ़ी और मूंछों वाली हनुमान जी की अनूठी मूर्ति के लिए प्रसिद्ध है।
उत्पत्ति और इतिहास
मूर्ति का प्रकटीकरण: पौराणिक कथा के अनुसार, यह मूर्ति विक्रम संवत् 1811 (सन् 1755) में श्रावण शुक्ल नवमी, शनिवार को नागौर जिले के आसोटा गांव में एक किसान को खेत जोतते समय मिली थी। किसान ने उस मूर्ति को चूरमे का भोग लगाया, जो आज भी बालाजी को अर्पित किया जाता है।
स्थापना: उसी रात, आसोटा के ठाकुर और सालासर के भक्त मोहनदास जी महाराज दोनों को स्वप्न में बालाजी ने मूर्ति को सालासर में स्थापित करने का निर्देश दिया। मोहनदास जी की भक्ति से प्रसन्न होकर बालाजी ने उन्हें दाढ़ी-मूंछों के साथ दर्शन दिए थे, इसलिए यहां बालाजी इसी रूप में विराजमान हैं।
स्थापना दिवस: 1754 ई. में शुभ मुहूर्त में मूर्ति को असोटा से बैलगाड़ी में सालासर लाया गया और मोहनदास जी महाराज ने इसकी स्थापना की।
महत्व और आयोजन
विशेषता: यह भारत में हनुमान जी का एकमात्र मंदिर है जहां मूर्ति दाढ़ी और मूंछों के साथ है, जो इसे अत्यंत विशेष बनाता है।
मेले: प्रतिवर्ष चैत्र पूर्णिमा और आश्विन पूर्णिमा के अवसर पर यहां विशाल मेलों का आयोजन होता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
नारियल चढ़ाना: भक्त मनोकामना पूरी करने के लिए लाल कपड़े में नारियल बांधकर चढ़ाते हैं, जिसे 'मनौती' का नारियल कहा जाता है।
वर्तमान सुविधाएं: मंदिर में दर्शनार्थियों की सुविधा के लिए नो-पार्किंग और नॉन-वेंडिंग जोन जैसे नए नियम लागू किए जा रहे हैं, साथ ही भक्तों के लिए हेलीकॉप्टर सेवा शुरू करने की योजना भी चर्चा में है।
यह मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि सेकुलरिज्म (धर्मनिरपेक्षता) का भी उदाहरण है, क्योंकि इसकी स्थापना में मुस्लिम कारीगरों ने भी योगदान दिया था।