काशी के घाट पर नरमुंडों की माला पहने शिव भक्तों ने जलती चिताओं की राख से खेली होली, 3 लाख टूरिस्ट बने गवाह

Update: 2026-02-28 10:44 GMT

काशी। काशी के मणिकर्णिका घाट पर आज 'मसाने की होली' का अद्भुत दृश्य देखने को मिला है। जहां लोगों ने धधकती चिताओं के बीच भस्म (राख) से होली खेली। साथ ही बाबा विश्ननाथ के विग्रह पर राख का गुलाल लगाया। बता दें कि इस अनूठी परंपरा का हिस्सा बनने के लिए देश-विदेश से लगभग 3 लाख पर्यटक वाराणसी पहुंचे हैं।

भस्म और गुलाल

श्रद्धालु जलती चिताओं की राख को एक-दूसरे पर डालकर 'हर-हर महादेव' के जयघोष के साथ झूमते नजर आए। घाट पर संन्यासी और अघोरी नरमुंडों की माला पहने, चश्मा लगाकर और डमरू बजाते हुए शिव भक्ति में लीन दिखे।

औघड़, नागा व साधु बड़ी संख्या में पहुंचे

 काशी के मणिकर्णिका घाट पर मसाने की होली का कार्यक्रम आयोजित किया गया तो औघड़, नागा व साधु बड़ी संख्या में पहुंचे। इन चिताओं के बीच इसी भस्म से लोगों ने होली खेली गई। गले में नरमुंड माला पहले, शरीर पर चिताओं का भस्म लगाए और हाथ में डमरू और त्रिशूल लिए साधु व नागाओं ने करतब भी दिखाए। यहां 11 नरमुंड से बना बड़ा पहने मनिकंडन महराज अपने शिष्यों के साथ इस कार्यक्रम में शामिल हुए। वहीं पगला बाबा भी अपने साथियों के साथ शामिल हुए।

मान्यता

यह उत्सव रंगभरी एकादशी के अगले दिन मनाया जाता है। माना जाता है कि भगवान शिव अपने गणों- भूत, प्रेत, पिशाच और अघोरियों के साथ यहां होली खेलते हैं।

पुलिस फोर्स की तैनाती 

बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ को देखते हुए यहां मणिकर्णिका घाट की गलियों में पुलिस फोर्स लगाई गई थी। करीब 2 घंटे तक आमजन को घाट पर जाने से रोका गया था, सिर्फ अतिम संस्कार के लिए जाने वालों को ही जाने की अनुमति दी जा रही थी।

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