Womens Day Special: महिला दिवस के मौके पर तापसी पन्नू और एकता कपूर ने साझा किया अनुभव! कहा- अब खात्मे के कगार पर हैं महिला प्रधान फिल्में ...
मुंबई। भारतीय फिल्म उद्योग में महिला प्रधान फिल्मों के भविष्य को लेकर हाल ही में गंभीर चिंताएं जताई गई हैं। इंडस्ट्री के दिग्गजों जैसे निर्माता एकता कपूर और अभिनेत्री तापसी पन्नू का मानना है कि इस तरह की फिल्में वर्तमान में खात्मे के कगार पर हैं। इसके पीछे के मुख्य कारण और वर्तमान स्थिति है।
1. दर्शकों के समर्थन में कमी
एकता कपूर के अनुसार, वर्तमान में महिला-केंद्रित कहानियों के लिए दर्शकों का समर्थन जुटाना बेहद मुश्किल हो गया है। अक्सर ऐसी फिल्मों को सिनेमाघरों में वह प्रतिक्रिया नहीं मिल पाती जो बड़े बजट की पुरुष प्रधान मसाला फिल्मों को मिलती है।
2. वित्तीय चुनौतियां और 'बॉक्स ऑफिस' दबाव
निवेश का जोखिम: महिला प्रधान फिल्मों में निवेश करना अब निर्माताओं के लिए जोखिम भरा माना जा रहा है क्योंकि दर्शक सिनेमाघरों तक कम संख्या में पहुंच रहे हैं।
कमाई का गणित: हालांकि मिसेज, मर्दानी 3 और लापता लेडीज जैसी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस और OTT पर अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन बड़े व्यावसायिक स्तर पर इनका टिकना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
3. हालिया सफल और चर्चित महिला प्रधान फिल्में
इन चुनौतियों के बावजूद, पिछले कुछ समय में कुछ महत्वपूर्ण फिल्मों ने अपनी छाप छोड़ी है।
मर्दानी 3
रानी मुखर्जी की दमदार एक्टिंग है, महिला को सशक्त भूमिका में दिखाया गया।
लापता लेडीज (2024) किरण राव द्वारा निर्देशित यह फिल्म ग्रामीण भारत की महिलाओं की कहानियों को खूबसूरती से दर्शाती है।
मिसेज
सान्या मल्होत्रा अभिनीत, जो घरेलू श्रम और पितृसत्तात्मक ढांचे पर सवाल उठाती है।
गंगूबाई काठियावाड़ी (2022)
आलिया भट्ट की इस फिल्म ने दिखाया कि महिला प्रधान फिल्में भी ब्लॉकबस्टर हो सकती हैं।
थप्पड़
महिला सशक्तिकरण का बेहतरीन उदाहरण है।
क्वीन
आज भी महिला सशक्तिकरण की मिसाल मानी जाती हैं।
4. OTT बनाम सिनेमाघर
महिला प्रधान फिल्मों का एक बड़ा हिस्सा अब सिनेमाघरों के बजाय OTT प्लेटफॉर्म्स (जैसे Netflix, ZEE5, Amazon Prime) की ओर रुख कर रहा है।