आवारा कुत्तों से जुड़े मामले में सुप्रीम सुनवाई पूरी! सुरक्षित रखा फैसला, कोर्ट ने पक्षकारों को दिया ये निर्देश
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आज आवारा कुत्तों से जुड़े मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। बता दें कि इससे एक दिन पहले कोर्ट ने सभी राज्यों की दलीलें सुनी थीं। अदालत ने कुत्तों से प्रेम करने वालों, कुत्तों के काटने के शिकार लोगों, पशु अधिकार कार्यकर्ताओं और केंद्र व राज्य सरकारों की ओर से पेश वकीलों सहित सभी पक्षों की बात विस्तार से सुनने के बाद सुनवाई पूरी की। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने न्यायमित्र गौरव अग्रवाल की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। अग्रवाल ने पीठ के समक्ष पंजाब, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों द्वारा उठाए गए कदमों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया।
भारी मुआवजे की चेतावनी
कोर्ट ने संकेत दिया है कि कुत्ते के काटने से होने वाली हर चोट या मौत के लिए राज्य सरकारों को भारी मुआवजा देना होगा। कोर्ट ने कहा कि जो लोग कुत्तों को खाना खिलाते हैं, उनकी भी जवाबदेही तय की जाएगी। यदि वे जिम्मेदारी नहीं ले सकते, तो उन्हें कुत्तों को अपने घर के अंदर रखना चाहिए। कोर्ट ने 7 नवंबर 2025 के अपने पिछले आदेश को दोहराया कि स्कूलों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों और बस स्टैंडों जैसे उच्च-फुटफॉल वाले क्षेत्रों को "डॉग-फ्री" बनाया जाए।
राज्यों की विफलता पर फटकार
कोर्ट ने राज्यों द्वारा दाखिल हलफनामों को भ्रामक और अधूरा बताया, विशेष रूप से असम और गुजरात जैसे राज्यों में नसबंदी केंद्रों की कमी और बढ़ते मामलों पर चिंता जताई।
NHAI को निर्देश
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) को राजमार्गों से आवारा जानवरों को हटाने और इसके लिए एक ऐप विकसित करने को कहा गया है, जिससे लोग फोटो क्लिक कर शिकायत कर सकें। सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को एक सप्ताह के भीतर अपनी लिखित दलीलें जमा करने का निर्देश दिया है, जिसके बाद अंतिम निर्णय सुनाया जाएगा।