होलिका दहन में पड़ रही 3 बड़ी बाधाएं! भद्रा और चंद्र ग्रहण का पड़ेगा असर, तारीख को लेकर कंफ्यूजन

Update: 2026-02-05 02:30 GMT

नई दिल्ली। हर साल फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि के दिन होली का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है। ये त्योहार भारत के सबसे रंगीन और उल्लासपूर्ण त्योहारों में शामिल है। साल 2026 में 4 मार्च को रंगों वाली होली खेली जाएगी, लेकिन इससे पहले होलिका दहन में ज्योतिषीय और खगोलीय कारणों से 3 बड़ी बाधाएं सामने आ रही हैं।

भद्रा का साया

होलिका दहन के लिए भद्रा का न होना अनिवार्य है। 2026 में पूर्णिमा तिथि 2 मार्च की शाम से शुरू हो रही है, लेकिन उस समय भद्रा काल प्रभावी रहेगा। शास्त्रों के अनुसार, भद्रा मुख में होलिका दहन करने से अनिष्ट की आशंका रहती है।

चंद्र ग्रहण और सूतक

3 मार्च 2026 को साल का पहला चंद्र ग्रहण लग रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण से 9 घंटे पहले ही सूतक काल शुरू हो जाता है, जिस दौरान किसी भी प्रकार का उत्सव, पूजा-पाठ या मांगलिक कार्य वर्जित होता है।

तिथि का भ्रम

फाल्गुन पूर्णिमा तिथि 2 मार्च को शाम 5:21 बजे शुरू होकर 3 मार्च को शाम 4:34 बजे समाप्त हो जाएगी। चूंकि शास्त्र सम्मत होलिका दहन प्रदोष काल वाली पूर्णिमा को होता है, इसलिए ग्रहण और भद्रा के कारण दहन की सही तारीख (2 या 3 मार्च) को लेकर विद्वानों के बीच सामंजस्य की कमी देखी जा रही है। अधिकांश पंचांगों के अनुसार, इन बाधाओं के कारण 3 मार्च को सूतक और ग्रहण समाप्त होने के बाद ही पर्व की शुद्धता मानी जाएगी, जिससे रंगों की होली 4 मार्च को मनाई जाएगी। 

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