कनाडा के पीएम मार्क कार्नी के इस बयान पर ट्रंप भड़के! बोर्ड ऑफ पीस वाला निमंत्रण लिया वापस...
35 देशों ने इस बोर्ड में शामिल होने की सहमति दे दी है। इनमें इजरायल, तुर्की, मिस्र, सऊदी अरब और कतर जैसे पश्चिम एशिया के प्रमुख देश शामिल हैं।
नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के गठन का ऐलान किया है। इस बोर्ड का मकसद दुनियाभर में जारी युद्धों को लेकर समाधान करना है। दरअसल ट्रंप ने शुरुआत में कनाडा को भी बोर्ड में शामिल होने का निमंत्रण भेजा था, लेकिन कनाडा के पीएम मार्क कार्नी की ओर से किसी आधिकारिक प्रतिक्रिया आने से पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपना निमंत्रण वापस ले लिया। वहीं, 35 देशों ने इस बोर्ड में शामिल होने की सहमति दे दी है।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि पीएम कार्नी, कृपया इस पत्र को इस बात का प्रमाण मानें कि बोर्ड ऑफ पीस में कनाडा को शामिल करने के आपका निमंत्रण वापस लिया जा रहा है। यह बोर्ड अब तक का सबसे प्रतिष्ठित वैश्विक नेतृत्व मंच होगा।
35 देशों की सहमति
35 देशों ने इस बोर्ड में शामिल होने की सहमति दे दी है। इनमें इजरायल, तुर्की, मिस्र, सऊदी अरब और कतर जैसे पश्चिम एशिया के प्रमुख देश शामिल हैं। हालांकि, अमेरिका के पारंपरिक सहयोगी माने जाने वाले कई यूरोपीय देश अभी इस पहल से दूरी बनाए हुए हैं। यह देश न तो सदस्यता को लेकर पूरी तरह सहमत हुए हैं और न ही बोर्ड के फीस सिस्टम पर अपनी हामी भरी है।
ट्रंप इस बोर्ड के आजीवन अध्यक्ष रह सकते हैं
जानकारी के मुताबिक, बोर्ड में स्थायी सदस्य बनने के लिए किसी भी देश को कम से कम एक अरब अमेरिकी डॉलर का भुगतान करना होगा। ऐसा कहा रहा है कि ट्रंप इस बोर्ड के आजीवन अध्यक्ष रह सकते हैं, जबकि अन्य सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्ष तक रहेगा।
50 देशों को भेजा गया निमंत्रण
व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने जानकारी दी कि 50 देशों को बोर्ड में शामिल होने का न्योता भेजा गया है। हालांकि, कई देशों की ओर से अब तक कोई जवाब नहीं आया है। अंतिम रूप से किन देशों को सदस्यता मिलेगी, इसकी सूची अब तक जारी नहीं की गई है।
गौरतलब है कि इस पूरे घटनाक्रम की जड़ कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का हालिया दावोस भाषण माना जा रहा है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में दिए गए अपने भाषण में कार्नी ने तथाकथित ‘मध्यम शक्तियों’ से महाशक्तियों की धमकियों के खिलाफ एकजुट होने की अपील की थी। हालांकि उन्होंने ट्रंप का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया है। कार्नी ने दावोस में कहा था कि नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की दुहाई देना बंद करें।