स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद मामले में बोली उमा भारती, कहा- शंकराचार्य का सबूत मांगना गलत....

Update: 2026-01-27 11:02 GMT

प्रयागराज। प्रयागराज माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच चल रहे विवाद पर पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने सोशल मीडिया (X) पर पोस्ट के जरिए प्रशासनिक अधिकारियों की कार्रवाई की कड़ी आलोचना की हैं।

प्रशासनिक मर्यादा का उल्लंघन

उमा भारती ने लिखा कि प्रमुझे विश्वास है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज एवं उत्तर प्रदेश सरकार के बीच कोई सकारात्मक समाधान निकल आएगा किंतु प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा शंकराचार्य होने का सबूत मांगना, यह प्रशासन ने अपनी मर्यादाओं एवं अधिकारों का उल्लंघन किया है। यह अधिकार तो सिर्फ शंकराचार्यों का एवं विद्वत परिषद का है।

योगी जी के विरुद्ध नहीं

उमा भारती ने आगे लिखा कि- योगी विरोधी खुश फहमी ना पालें, मेरा कथन योगी जी के विरुद्ध नहीं है, मैं उनके प्रति सम्मान, स्नेह एवं शुभकामना का भाव रखती हूं किंतु मैं इस बात पर कायम हूं कि प्रशासन कानून-व्यवस्था पर सख्ती से नियंत्रण करे लेकिन किसी के शंकराचार्य होने का सबूत मांगना मर्यादा का उल्लंघन है, यह सिर्फ शंकराचार्य या विद्वत परिषद कर सकते हैं।

क्या है विवाद

जानकारी के मुताबिक विवाद तब शुरू हुआ जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उन्हें संगम स्नान के लिए अपमानजनक तरीके से रोका। जिसके बाद प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने उन्हें नोटिस जारी कर उनके शंकराचार्य होने का प्रमाण मांग लिया था। 

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