भारत की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक मस्जिदों में से एक दिल्ली की जामा मस्जिद पर जब ब्रिटिश सेना ने कर लिया था कब्जा, जानें फिर क्या हुआ

Update: 2026-01-11 02:30 GMT

नई दिल्ली। दिल्ली की जामा मस्जिद भारत की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक मस्जिदों में से एक है। इसका निर्माण बादशाह शाहजहां ने करवाया था। जामा मस्जिद दिल्ली का एक प्रमुख स्थल है, जो इसे आवासीय और व्यावसायिक स्थान के लिए एक अच्छा विकल्प बनाता है।

इतिहास

इसका निर्माण मुगल सम्राट शाहजहां ने करवाया था। निर्माण कार्य 1644 में शुरू हुआ और 1656 में पूरा हुआ। इसे बनाने में उस समय लगभग 10 लाख रुपये का खर्च आया था और करीब 5,000 मजदूरों ने इसमें काम किया था। इसका डिजाइन उस्ताद खलील ने तैयार किया था और निर्माण कार्य वजीर सादुल्लाह खान की देखरेख में हुआ था।

नाम और महत्व

इसे मूल रूप से 'मस्जिद-ए-जहांनुमा' कहा जाता था, जिसका अर्थ है "दुनिया का नजारा दिखाने वाली मस्जिद"। इसका उद्घाटन 23 जुलाई 1656 को उज्बेकिस्तान के बुखारा से आए इमाम सैयद अब्दुल गफूर शाह बुखारी ने किया था, जिन्हें शाहजहाँ ने 'शाही इमाम' की उपाधि दी थी।

वास्तुकला की विशेषताएं

सामग्री: यह मस्जिद मुख्य रूप से लाल बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर से बनी है।

संरचना: इसमें तीन विशाल प्रवेश द्वार, चार मीनारें और दो 40 मीटर ऊंची मीनारें हैं।

क्षमता: इसके विशाल प्रांगण में एक साथ लगभग 25,000 लोग नमाज पढ़ सकते हैं।

प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएं

1857 का विद्रोह: 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ब्रिटिश सेना ने इस मस्जिद पर कब्जा कर लिया था और इसे नुकसान पहुंचाने की योजना बनाई थी, लेकिन भारी विरोध के कारण इसे गिराया नहीं गया।

धार्मिक अवशेष: यहाँ पैगंबर मोहम्मद से जुड़ी कई पवित्र वस्तुएं सुरक्षित रखी गई हैं, जिनमें हिरण की खाल पर लिखी कुरान की प्राचीन प्रति भी शामिल है।

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