नवरात्रि में क्यों की जाती है कलश की स्थापना? जानें कलश में डाली जाने वाली सामग्री

Update: 2026-03-07 02:30 GMT

नई दिल्ली। नवरात्रि में कलश (घट) स्थापना को माता दुर्गा के आह्वान और ब्रह्मांडीय ऊर्जा को आत्मसात करने का प्रतीक माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, कलश को ब्रह्मांड का लघु रूप और देवी आद्या शक्ति का स्वरूप मानकर पूजा जाता है, जिससे घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

कलश में डाली जाने वाली आवश्यक सामग्री

कलश तैयार करते समय उसमें निम्नलिखित चीजें डालना अत्यंत शुभ और अनिवार्य माना जाता है:

पवित्र जल और गंगाजल: सबसे पहले कलश में थोड़ा गंगाजल डालें और फिर उसे शुद्ध जल से कंठ (गले) तक भर दें।

सिक्का: समृद्धि के प्रतीक के रूप में कलश के अंदर एक चांदी या तांबे का सिक्का डालें।

सुपारी: अखंडता और सौभाग्य के लिए एक साबुत सुपारी डालें।

हल्दी की गांठ: शुद्धिकरण के लिए साबुत हल्दी की गांठ डालें; यदि उपलब्ध न हो तो एक चुटकी हल्दी पाउडर का प्रयोग करें।

दूर्वा (घास): शुभता और विकास के प्रतीक के रूप में दूर्वा घास डाली जाती है।

लौंग और इलायची: पवित्रता के लिए लौंग का एक जोड़ा और छोटी इलायची कलश के जल में अर्पित करें।

अक्षत (चावल): बिना टूटे हुए चावल के कुछ दाने डालें, जो संपन्नता दर्शाते हैं।

इत्र और फूल: जल को सुगंधित बनाने के लिए थोड़ा इत्र और लाल या पीले पुष्प डालें।

कलश स्थापना की संक्षिप्त विधि

स्थान: पूजा स्थल की उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) सबसे शुभ होती है।

आधार: लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर अनाज (जौ या सप्तधान्य) का आसन दें।

सजावट: कलश के मुख पर आम या अशोक के 5 या 7 पत्ते सजाएं।

नारियल: नारियल (श्रीफल) पर लाल चुनरी या कलावा लपेटकर कलश के ऊपर इस प्रकार रखें कि उसका मुख आपकी ओर या ऊपर की ओर हो। 

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