44 दिवसीय माघ मेले में 22 करोड़ श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी… टूटा कुंभ का रिकॉर्ड
प्रयागराज। प्रयागराज में 44 दिनों तक चले आस्था के सबसे बड़े वार्षिक समागम 'माघ मेला 2026' का महाशिवरात्रि के पावन स्नान के साथ ऐतिहासिक समापन हुआ। इस वर्ष के मेले ने भीड़ के सभी पुराने रिकॉर्ड्स को ध्वस्त कर दिया है। मेला प्रशासन के अनुसार, 44 दिनों में कुल 22.10 करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम में पवित्र डुबकी लगाई।
महाशिवरात्रि स्नान
मेले के अंतिम दिन लगभग 40 लाख लोगों ने त्रिवेणी संगम पर आस्था की डुबकी लगाई। इस वर्ष की संख्या ने 2013 के महाकुंभ (लगभग 12 करोड़) के रिकॉर्ड को काफी पीछे छोड़ दिया है।
प्रमुख स्नान पर्व
सबसे अधिक भीड़ मौनी अमावस्या (18 जनवरी) पर देखी गई, जब करीब 4.36 करोड़ लोग संगम पहुंचे थे।
प्रशासनिक प्रबंध
भीड़ को देखते हुए Prayagraj Mela Authority ने तीन-स्तरीय सुरक्षा और ड्रोन निगरानी की व्यवस्था की थी। इस भव्य आयोजन की सफलता ने सनातन धर्म के प्रति लोगों की बढ़ती आस्था और उत्तर प्रदेश सरकार के बेहतर प्रबंधन को वैश्विक मंच पर एक नई पहचान दी है।
कलियुग का श्रवण कुमार मां को कंधे पर बिठाकर पहुंचा
प्रयागराज में महाशिवरात्रि (15 फरवरी 2026) के पावन अवसर पर मातृ-भक्ति का एक अद्भुत उदाहरण सामने आया है, जिसे देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। राम भजन यादव, जो मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के रहने वाले हैं। उनकी मां की उम्र 100 वर्ष है। ऐसे में अपनी बुजुर्ग मां की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए राम भजन उन्हें अपने कंधों पर बिठाकर कई किलोमीटर पैदल चलकर त्रिवेणी संगम पहुंचे। मां काफी समय से महाशिवरात्रि के दिन संगम में पवित्र स्नान करने की इच्छा रखती थीं, लेकिन अत्यधिक उम्र और चलने में असमर्थ होने के कारण यह कठिन था।
संगम तट पर मौजूद श्रद्धालुओं ने बेटे के इस निस्वार्थ प्रेम और सेवा भाव को देखकर उन्हें फूलों की माला पहनाकर सम्मानित किया। राम भजन ने इस मौके पर भावुक होते हुए कहा कि जिस तरह बचपन में मां ने उन्हें अपने कंधों पर घुमाया था, आज उनका कर्ज चुकाने की उनकी बारी है।