शुरू हो चुकी है ब्रज की होली! जानें कब, कहां और कैसे मनेगा रंगोत्सव? क्या है 40 दिनों की होली का पूरा शेड्यूल

Update: 2026-02-25 14:30 GMT

मथुरा। मथुरा-वृंदावन (ब्रज) में होली का उत्सव केवल एक दिन का नहीं, बल्कि लगभग 40 दिनों तक चलने वाला भव्य आयोजन है। यह भक्ति, परंपरा और उत्साह से भरा त्योहार है। 23 जनवरी 2026 से ब्रज होली का शुभारंभ हो चुका है, जो पूरे क्षेत्र में धीरे-धीरे रंग जमाते हुए मुख्य पर्व तक पहुंचता है। उत्तर प्रदेश के ब्रज क्षेत्र में मनाया जाने वाला यह उत्सव देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है। आज 25 फरवरी बरसाना में लठमार होली का आयोजन किया गया।

किन शहरों में मनाई जाती है ब्रज की होली?

मथुरा, वृंदावन, बरसाना,नंदगांव, गोकुल, महावन, बलदेव में ब्रज क्षेत्र के इन शहरों में यह रंगोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है।

ब्रज होली की प्रमुख परंपराएं

फूलों की होली- वृंदावन के मंदिरों में भक्तों पर फूल बरसाकर होली खेली जाती है. यह दृश्य अत्यंत मनमोहक और आध्यात्मिक होता है।

लठमार होली- बरसाना और नंदगांव की लठमार होली सबसे अनोखी परंपरा है। इसमें महिलाएं हंसी-मजाक में पुरुषों को लाठियों से मारती हैं और पुरुष ढाल से बचाव करते हैं। तो वहीं गोकुल और महावन में छड़ी मार होली और पारंपरिक हुरंगा आकर्षण का केंद्र होते हैं।

होलिका दहन और धुलेंडी

3 मार्च 2026 की शाम को होलिका दहन होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार 3 मार्च को चंद्र ग्रहण लगने के कारण विशेष सावधानी रखी जाएगी। 4 मार्च की सुबह रंगवाली होली यानी धुलेंडी खेली जाएगी।

ब्रज होली 2026 मुख्य कार्यक्रम तिथियां

24 फरवरी (मंगलवार): लड्डू होली, बरसाना (श्रीजी मंदिर)। भक्त एक-दूसरे पर लड्डू और गुलाल फेंककर उत्सव मनाते हैं।

25 फरवरी (बुधवार): लट्ठमार होली, बरसाना। यहां नंदगांव के हुरियारे (पुरुष) आते हैं और बरसाना की गोपियां (महिलाएं) उन पर लाठियां बरसाती हैं।

26 फरवरी (गुरुवार): लट्ठमार होली, नंदगांव (नंद भवन)। बरसाना के पुरुष नंदगांव जाते हैं और वहां की महिलाएं लाठियों से उनका स्वागत करती हैं।

27 फरवरी (शुक्रवार): रंगभरनी एकादशी। इस दिन वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में रंगों की होली शुरू होती है और मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि में विशेष आयोजन होते हैं।

28 फरवरी (शनिवार): फूलों वाली होली, वृंदावन। बांके बिहारी मंदिर में भक्तों पर फूलों की वर्षा की जाती है।

1 मार्च (रविवार): छड़ी मार होली, गोकुल। यहां महिलाएं लाठी के बजाय छोटी छड़ियों से प्रतीकात्मक रूप से कान्हा (बाल स्वरूप) को मारती हैं।

2 मार्च (सोमवार): विधवा होली, वृंदावन (गोपीनाथ मंदिर)। यहां सफेद साड़ी पहने माताएं और बहनें गुलाल से होली खेलती हैं।

3 मार्च (मंगलवार): होलिका दहन। मथुरा के विश्राम घाट और द्वारकाधीश मंदिर के पास मुख्य दहन उत्सव आयोजित किया जाता है।

4 मार्च (बुधवार): मुख्य होली (धुलेंडी)। पूरे ब्रज क्षेत्र में अबीर-गुलाल और रंगों वाली मुख्य होली खेली जाती है। 

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