Chandra Grahan 2025: चंद्र ग्रहण पर क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त? जानें स्नान दान का सही तरीका

Update: 2025-08-29 02:30 GMT

नई दिल्ली। धार्मिक दृष्टिकोण से ग्रहण को अशुभ माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में चंद्र ग्रहण को एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना माना जाता है, जिसे धार्मिक दृष्टि से शुभ नहीं माना जाता है। चंद्र ग्रहण के दौरान कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। इसके अलावा सूर्य ग्रहण लगने पर खाना खाने, खाना बनाने और सोने के लिए भी मना किया जाता है। इस साल चार ग्रहण लगने वाले थे, जिसमें दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण हैं. साल 2025 का अंतिम चंद्र ग्रहण लगने ही वाला है

भारत में दृश्य होगा या नहीं चंद्र ग्रहण?

साल का दूसरा चंद्र ग्रहण 7 सितंबर, रविवार को रात 9 बजकर 58 मिनट पर लगेगा और इसका समापन 8 सितंबर की रात 1 बजकर 26 मिनट पर होगा। ज्योतिषियों की मानें तो 7 सितंबर को दिखने वाला चंद्र ग्रहण एकदम लाल दिखेगा, जिसे ब्लड मून के नाम से भी जाना जाता है।

कब से कब लगेगा सूतक?

चंद्र ग्रहण के शुरू होने से करीब 9 घंटे पहले सूतक काल प्रारंभ हो जाता है। चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए सूतक काल का प्रभाव भी यहां लागू होगा। इस दौरान पूजा-पाठ और अन्य शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है‌। आगामी चंद्र ग्रहण का सूतक काल दोपहर 12:57 बजे शुरू हो जाएगा।

स्नान दान का समय

चंद्र ग्रहण के दौरान स्नान दान को अत्यंत पूर्णकारी माना जाता है क्योंकि यह ग्रहण पितृपक्ष के ठीक पहले आ रहा है। ग्रहण से ठीक पहले यानी 7 सितंबर को शाम 5:30 बजे से रात 8:05 तक स्नान किया जा सकता है।

पूजा का शुभ मुहूर्त

चंद्र ग्रहण के दौरान पूजा पाठ ग्रह निवारण और आध्यात्मिक उन्नति के लिए किया जाता है। हालांकि सूतक के कारण रात्रि पूजा पर प्रतिबंध है लेकिन ग्रहण से पहले और बाद में पूजा संभव है। ग्रह प्रारंभ से पहले यानी 7 सितंबर को शाम 6 बजे से रात 8 बजे तक तैयारी करें। मुख्य पूजा ग्रहण के मध्यकाल रात 11:42 बजे के आसपास में की जा सकती है। लेकिन केवल यदि आप सूतक का पालन कर रहे हो। इस दौरान चंद्रमा को अर्घ्य दें और महामृत्युंजय मंत्र या चंद्र स्तोत्र का पाठ करें।

Tags:    

Similar News