दिमाग के कीड़ों से पड़ते हैं, बच्चों को दौरे? जानें इसके खतरे और बचने के तरीके
नई दिल्ली। दिमाग के कीड़े, जिसे मेडिकल भाषा में न्यूरोसिस्टिसर्कोसिस (Neurocysticercosis) कहा जाता है, बच्चों में मिर्गी या दौरे पड़ने का एक प्रमुख कारण है। जब भी बच्चों को दौरे पड़ते थे, तो डॉक्टर इस दौरे पड़ने का कारण बुखार, मिर्गी और परिवार में किसी अन्य सदस्य को भी इसी समस्या का होना, जिसे हम पारिवारिक इतिहास भी कहते हैं। हाल ही में आई कई रिपोर्ट्स के अनुसार, बच्चों को दौरे पड़ना नर्वस सिस्टम या नसों के तंत्र में संक्रमण या किसी इंफेक्शन की वजह से नहीं, बल्कि दिमाग में कीड़ों की उपस्थिति की वजह से होता है।
दौरे कैसे पड़ते हैं?
अंडे निगलना: जब बच्चे दूषित भोजन या पानी के माध्यम से फीताकृमि (Tapeworm) के सूक्ष्म अंडे निगल लेते हैं, तो ये अंडे पेट में जाकर लार्वा बन जाते हैं।
मस्तिष्क में गांठ (Cyst): यह लार्वा रक्त के जरिए दिमाग तक पहुँचता है और वहां सिस्ट (छोटी गांठें) बना लेता है।
प्रतिरक्षा प्रणाली की प्रतिक्रिया: जब ये कीड़े मरने लगते हैं या सिस्ट टूटने लगती है, तो दिमाग की प्रतिरक्षा प्रणाली सक्रिय हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप सिस्ट के चारों ओर सूजन (Inflammation) आती है।
इलेक्ट्रिकल डिस्टर्बेंस: यह सूजन मस्तिष्क कोशिकाओं के विद्युत संकेतों (Electrical signals) में गड़बड़ी पैदा करती है, जिससे अचानक दौरे या झटके आते हैं।
खतरे और लक्षण
दौरे और बेहोशी: अचानक हाथ-पैर कांपना या बेहोश हो जाना।
गंभीर सिरदर्द: लंबे समय तक रहने वाला तेज सिरदर्द और उल्टी।
अन्य जोखिम: अगर इलाज न कराया जाए, तो यह दृष्टि हानि, मानसिक विकलांगता या जानलेवा भी हो सकता है।
बचने के तरीके
सफाई: शौचालय जाने के बाद और खाना खाने से पहले हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोएं।
सब्जियों की धुलाई: हरी पत्तेदार सब्जियां (जैसे पत्ता गोभी) और फल हमेशा अच्छी तरह धोकर ही इस्तेमाल करें।
पका हुआ खाना: कच्चा या अधपका मांस (विशेषकर सूअर का मांस) खाने से बचें।
स्वच्छ पानी: हमेशा साफ और सुरक्षित पानी पिएं।
नियमित डीवॉर्मिंग: डॉक्टर की सलाह पर बच्चों को नियमित रूप से कीड़े मारने वाली दवा (जैसे एल्बेंडाजोल) दें।