असम के प्रमुख त्योहार बीहू को ध्यान में रखते हुए चुनाव कार्यक्रम तय किया जाएगा: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा असम में एसआईआर कराने का केवल एक ही मकसद था, सभी पात्र मतदाताओं को शामिल करना और अपात्र मतदाताओं को हटाना।
नई दिल्ली। असम में चल रही SIR प्रक्रिया को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने साफ किया है कि इसका एकमात्र उद्देश्य योग्य मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल करना और अयोग्य लोगों को बाहर करना है। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और नियमों के तहत की गई है। असम के प्रमुख त्योहार बीहू को ध्यान में रखते हुए चुनाव कार्यक्रम तय किया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सभी पक्षों से प्राप्त सुझावों का मूल्यांकन कर संतुलित और व्यावहारिक चुनाव कार्यक्रम घोषित किया जाएगा।
व्यावहारिक चुनाव कार्यक्रम घोषित किया जाएगा
वहीं मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने स्पष्ट किया है कि समीक्षा बैठकों के दौरान मिले सभी सुझावों और प्रस्तावों पर गंभीरता से विचार करने के बाद ही मतदान की तारीखों का अंतिम निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग राज्य की सांस्कृतिक और सामाजिक परिस्थितियों को समझते हुए फैसला करता है, ताकि त्योहारों और महत्वपूर्ण आयोजनों के दौरान मतदाताओं को किसी तरह की असुविधा न हो। ज्ञानेश कुमार के मुताबिक, आयोग की प्राथमिकता स्वतंत्र, निष्पक्ष और सुचारु चुनाव कराना है, लेकिन इसके साथ ही स्थानीय परंपराओं और जनभावनाओं का सम्मान करना भी उतना ही जरूरी है।
1200 मतदाताओं की सीमा तय
चुनाव आयोग ने प्रत्येक मतदान केंद्र पर अधिकतम 1,200 मतदाताओं की सीमा तय की है। इससे मतदान प्रक्रिया अधिक सुगम और व्यवस्थित होने की उम्मीद है। आयोग का मानना है कि इससे लंबी कतारों और भीड़भाड़ की समस्या कम होगी और मतदान प्रतिशत भी बढ़ सकता है। पहली बार असम में मतदाताओं को मतदान केंद्र के प्रवेश द्वार पर अपने मोबाइल फोन रखने की अनुमति दी जाएगी। अब तक कई जगहों पर मोबाइल फोन ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहता था, जिससे मतदाताओं को असुविधा होती थी। नई व्यवस्था के तहत प्रवेश द्वार पर सुरक्षित जमा करने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
SIR का मकसद क्या है?
वहीं मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा असम में एसआईआर कराने का केवल एक ही मकसद था, सभी पात्र मतदाताओं को शामिल करना और अपात्र मतदाताओं को हटाना। उन्होंने जोर देकर कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बुनियाद है और चुनाव आयोग का दायित्व है कि सूची निष्पक्ष और त्रुटिरहित हो।
मतदाता-हितैषी बनाने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही हैं
वहीं मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि चुनाव आयोग का उद्देश्य केवल स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना ही नहीं, बल्कि मतदाताओं को अधिकतम सुविधा देना भी है। रंगीन फोटो, बड़े अक्षरों में नाम, सीमित मतदाता संख्या और मोबाइल जमा सुविधा जैसे कदम उसी दिशा में उठाए गए हैं। असम में चुनावी माहौल के बीच आयोग की ये घोषणाएं प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और मतदाता-हितैषी बनाने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही हैं।