कभी सोचा है कि आखिर क्यों दाह संस्कार के समय फोड़ा जाता है पानी से भरा घड़ा? जानें परंपरा के पीछे का रहस्य

Update: 2026-02-14 02:30 GMT

नई दिल्ली। हिंदू धर्म के अंतिम संस्कार में पानी से भरा घड़ा फोड़ना केवल एक रस्म नहीं, बल्कि जीवन और मृत्यु के गहरे दर्शन से जुड़ी परंपरा है। इसके पीछे कई आध्यात्मिक और प्रतीकात्मक कारण हैं।

शरीर और आत्मा का प्रतीक

इस रस्म में मिट्टी का घड़ा मानव शरीर का और उसके अंदर भरा पानी आत्मा (जीवन शक्ति) का प्रतीक माना जाता है।

मोह भंग करना

छेद वाले घड़े से टपकता पानी यह दर्शाता है कि मनुष्य की आयु धीरे-धीरे समाप्त हो रही है। अंत में घड़ा फोड़ना इस बात का संकेत है कि अब आत्मा का शरीर और इस संसार से सारा मोह और संबंध समाप्त हो गया है।

पंचतत्व में विलीनीकरण

जैसे मिट्टी का घड़ा फूटकर मिट्टी में मिल जाता है, वैसे ही यह रस्म याद दिलाती है कि मानव शरीर भी अंततः पंचतत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) में विलीन हो जाएगा।

मोक्ष की ओर प्रस्थान

घड़ा फोड़कर मुख्य शोकाकुल व्यक्ति (जैसे बड़ा बेटा) बिना पीछे मुड़े वापस आता है। यह मृत आत्मा को संदेश देता है कि अब उसे अपने पुराने शरीर को त्यागकर आगे की यात्रा (पुनर्जन्म या मोक्ष) पर निकल जाना चाहिए।

कपाल क्रिया से जुड़ाव

कुछ मान्यताओं के अनुसार, यह क्रिया कपाल क्रिया का हिस्सा है, जो आत्मा को शरीर के 'ब्रह्मरंध्र' से पूर्णतः मुक्त करने में मदद करती है। 

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