आदिवासी समाज की अस्मिता पर चोट..केशव प्रसाद ममता बनर्जी पर भड़के! कहा- सरकार का व्यवहार घोर निंदनीय

.केशव प्रसाद ने कहा ममता दीदी के नेतृत्व में टीएमसी सरकार ने लोकतंत्र की सारी सीमाएं लांघ दी हैं। राष्ट्रपति का पद राजनीति से ऊपर है, लेकिन बंगाल सरकार का व्यवहार उनके असंवैधानिक मानस को दर्शाता है।

Update: 2026-03-08 12:44 GMT

लखनऊ।  उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने ममता बनर्जी सरकार की कड़ी निंदा की है। उन्होंने सीएम ममता पर निशाना साधते हुए कहा है कि राज्य सरकार का आचरण लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है और उन्होंने सभी सीमाएं लांघ दी हैं।  दरअसल यह बयान हाल ही में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान हुए प्रोटोकॉल उल्लंघन और कार्यक्रम स्थल में बदलाव के विवाद को लेकर आया है।

लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन

केशव प्रसाद मौर्य ने आरोप लगाया कि ममता सरकार का व्यवहार लोकतंत्र के सिद्धांतों के विपरीत है। उन्होंने राष्ट्रपति के दौरे के समय हुए घटनाक्रमों को लेकर सरकार को घेरा। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस मामले में ममता सरकार पर सभी सीमाएं लांघने और राष्ट्रपति के पद की गरिमा का अपमान करने का आरोप लगाया था।

 राष्ट्रपति के कार्यक्रम से दूरी बनाना निंदनीय

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यक्रम से दूरी बनाना और उनका सम्मान न करना बेहद निंदनीय है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा पहले प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों का अनादर और अब आदिवासी समाज से आने वाली राष्ट्रपति का सार्वजनिक अपमान देश के सर्वोच्च पद और आदिवासी समाज की अस्मिता पर चोट है। ममता दीदी के नेतृत्व में टीएमसी सरकार ने लोकतंत्र की सारी सीमाएं लांघ दी हैं। राष्ट्रपति का पद राजनीति से ऊपर है, लेकिन बंगाल सरकार का व्यवहार उनके असंवैधानिक मानस को दर्शाता है।

प्रोटोकॉल विवाद

केंद्र सरकार ने राष्ट्रपति के दौरे के दौरान ब्लू बुक नियमों और सुरक्षा प्रोटोकॉल के कथित उल्लंघन पर पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव से आज यानी रविवार शाम तक जवाब मांगा है।

ममता पर सियासी हमला

मौर्य ने पहले भी दावा किया है कि ममता बनर्जी डरी हुई हैं और 2026 के विधानसभा चुनाव में जनता टीएमसी (TMC) सरकार को उखाड़ फेंकेगी। बता दें कि यह तीखी प्रतिक्रिया तब आई है जब राष्ट्रपति मुर्मू ने खुद बंगाल में आयोजित संथाल सम्मेलन के दौरान कार्यक्रम स्थल बदले जाने और मुख्यमंत्री या मंत्रियों की अनुपस्थिति पर नाराजगी जाहिर की थी।


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