किरण बेदी का सख्त संदेश: ‘कमरों से नहीं, धुंध में उतरकर रोकेगा दिल्ली का प्रदूषण’

उन्होंने दिल्ली की बिगड़ती हवा को “पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी” घोषित करते हुए कहा कि मौजूदा हालात किसी आकस्मिक घटना का परिणाम नहीं, बल्कि दशकों की प्रशासनिक असफलता और समन्वय की कमी का नतीजा हैं।;

By :  DeskNoida
Update: 2025-11-29 19:30 GMT

दिल्ली और एनसीआर में हवा की गुणवत्ता लगातार गिरने के साथ हालात चिंताजनक होते जा रहे हैं। राजधानी की धुंध भरी सुबहें अब आम बात बन चुकी हैं और प्रदूषण के बढ़ते स्तर ने लोगों का सांस लेना मुश्किल कर दिया है। इसी गंभीर स्थिति पर पूर्व आईपीएस अधिकारी और दिल्ली की पूर्व उपराज्यपाल किरण बेदी ने कड़ा रुख अपनाते हुए सरकार और प्रशासनिक तंत्र को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने दिल्ली की बिगड़ती हवा को “पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी” घोषित करते हुए कहा कि मौजूदा हालात किसी आकस्मिक घटना का परिणाम नहीं, बल्कि दशकों की प्रशासनिक असफलता और समन्वय की कमी का नतीजा हैं।

किरण बेदी ने अपनी एक्स प्रोफाइल पर कई पोस्ट साझा करते हुए दिल्ली के वायु प्रदूषण संकट से निपटने के मौजूदा सरकारी प्रयासों की तीखी आलोचना की। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि शासन को कमरों में बैठकर या रिमोट से संचालित नहीं किया जा सकता। उन्होंने अधिकारियों और प्रशासनिक नेताओं से आग्रह किया कि वे धूल और धुंध से भरी सड़कों पर उतरें, उन्हीं परिस्थितियों में सांस लें और समस्याओं को महसूस करते हुए समाधान तलाशें। उन्होंने लिखा, "सबसे अच्छा संवेदीकरण कार्यस्थल से बाहर निकलकर खुले आसमान में टहलना है। जो हवा लोग रोज झेल रहे हैं, अधिकारियों को भी उसी हवा में सांस लेनी चाहिए। तभी तेजी से फैसले होंगे और उनमें संवेदनशीलता भी आएगी।"

बेदी ने आगे कहा कि देश का वायु प्रदूषण संकट किसी एक दिन की देन नहीं है। यह उन व्यवस्थागत गलतियों का परिणाम है, जिनमें नेतृत्व, पारदर्शिता, निरंतरता और समन्वय की भारी कमी रही है। उन्होंने कहा कि एनसीआर के प्रदूषण पर तभी काबू पाया जा सकता है, जब हर संस्था अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से निभाए और फैसले कागज पर नहीं, जमीन पर उतरें।

उन्होंने तत्काल प्रभाव से “फील्ड प्रेजेंस” यानी मैदान में मौजूदगी को अनिवार्य बताया। किरण बेदी का मानना है कि रोजाना सड़क पर उतरने से न केवल समस्याओं की वास्तविकता समझ में आती है, बल्कि प्रशासनिक तंत्र में आवश्यक तत्परता भी विकसित होती है। यही वजह है कि उन्होंने क्षेत्रीय टाउन हॉल, वास्तविक समय के निरीक्षण, और जवाबदेही आधारित व्यवस्था को मजबूत करने की अपील की।

अपनी विस्तृत पोस्ट में किरण बेदी ने एक ठोस और बहु-स्तरीय कार्ययोजना भी सामने रखी। उन्होंने कहा कि पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को राष्ट्रीय मानकों और ईंधन नियमों को कड़ाई से लागू करना चाहिए। केंद्रीय गुणवत्ता प्रबंधन मंत्रालय को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में समान निर्देश सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। प्रधानमंत्री कार्यालय को प्रमुख मंत्रालयों को एक मंच पर लाना होगा, ताकि समन्वित योजना बनाई जा सके। उन्होंने राज्यों के मुख्यमंत्रियों, मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों को प्रदूषण नियंत्रण की जमीन पर अमल की जिम्मेदारी सौंपने की बात कही। उनके अनुसार जिला मजिस्ट्रेट को रोजाना के क्षेत्रीय कार्यान्वयन की कमान संभालनी चाहिए, जबकि नगर निकाय, पुलिस और प्रदूषण बोर्ड को अपशिष्ट प्रबंधन, धूल नियंत्रण, ट्रैफिक और औद्योगिक नियमों के पालन पर सख्ती से निगरानी करनी होगी।

दिल्ली में प्रदूषण का संकट हर साल सामने आता है, लेकिन बेदी के इस बयान ने इसे एक नई दिशा दी है। उन्होंने सिर्फ आलोचना नहीं की, बल्कि समाधान की एक स्पष्ट राह भी दिखाई। अब देखना यह है कि प्रशासन उनकी सलाह को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या राजधानी की हवा में सांस लेना फिर कभी आसान हो पाएगा।

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