माघ पूर्णिमा आज! क्या है स्नान-दान का विशेष महत्व, शास्त्रों में इसको लेकर क्या कहा गया?

Update: 2026-02-01 02:30 GMT

नई दिल्ली। माघ पूर्णिमा हिंदू धर्म में एक अत्यंत पावन और आध्यात्मिक तिथि मानी जाती है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन का महत्व केवल स्नान-दान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मोक्ष प्राप्ति और ग्रह दोषों से मुक्ति का द्वार भी माना गया है।

माघ पूर्णिमा 2026 स्नान-दान का मुहूर्त 

ज्योतिषियों के अनुसार, पूर्णिमा का स्नान और दान दोनों ही ब्रह्म मुहूर्त में किए जाते हैं। तो ऐसे में माघ पूर्णिमा के स्नान-दान का मुहूर्त सुबह 5 बजकर 24 मिनट से लेकर सुबह 6 बजकर 17 मिनट तक किया जाएगा। इसी दौरान स्नान दान करने से शुभ फलों और इच्छापूर्ति की प्राप्ति होगी।

देवताओं का पृथ्वी पर आगमन

ऐसी धार्मिक मान्यता है कि माघ पूर्णिमा के दिन देवता स्वर्ग से उतरकर पृथ्वी पर सूक्ष्म रूप में विचरण करते हैं। विशेष रूप से प्रयागराज के संगम में स्नान करने वाले श्रद्धालुओं को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।

अक्षय पुण्य की प्राप्ति

शास्त्रों के अनुसार, माघ मास की पूर्णिमा पर किया गया स्नान, जप और दान 'अक्षय' (जिसका कभी क्षय न हो) फल प्रदान करता है। इस एक दिन का पुण्य पूरे माघ मास के स्नान के बराबर माना गया है।

भगवान विष्णु का माधव स्वरूप

इस महीने का संबंध भगवान श्री कृष्ण के 'माधव' स्वरूप से है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन की दरिद्रता दूर होती है और सुख-समृद्धि आती है।

पापों से मुक्ति और मोक्ष

पद्म पुराण और स्कंद पुराण जैसे ग्रंथों के अनुसार, इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से कलयुग के दोषों और समस्त पापों से मुक्ति मिलती है।

ग्रह दोष निवारण

माघ पूर्णिमा पर स्नान करने से सूर्य और चंद्रमा से जुड़े कुंडली दोषों का प्रभाव कम होता है। इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण करने से पितृ दोष से भी राहत मिलती है।

दान का विशेष महत्व

शास्त्रों में इस दिन काले तिल, गुड़, घी, कंबल और वस्त्रों के दान को बहुत लाभकारी बताया गया है। 

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