कम उम्र में हार्ट अटैक आने के पीछे कोई एक नहीं, बल्कि कई गंभीर कारणों का है मेल, जानें क्या

Update: 2026-02-01 03:30 GMT

कम उम्र (20-40 वर्ष) में हार्ट अटैक आने के पीछे कोई एक नहीं, बल्कि कई गंभीर कारणों का मेल है। हालिया AIIMS-ICMR (जनवरी 2026) की स्टडी के अनुसार, भारत में होने वाली अचानक मौतों में से 57% मामले 18 से 45 वर्ष के युवाओं के हैं।

खराब जीवनशैली (Lifestyle)

शारीरिक सक्रियता की कमी (Sedentary Lifestyle) और जंक फूड का अधिक सेवन धमनियों में कोलेस्ट्रॉल जमा करता है, जिससे कम उम्र में ही ब्लॉकेज होने लगते हैं।

अत्यधिक मानसिक तनाव (Chronic Stress)

करियर और निजी जीवन का तनाव शरीर में कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन जैसे हार्मोन बढ़ाता है, जो सीधे हृदय की गति और रक्तचाप (BP) को प्रभावित करते हैं।

धूम्रपान और नशा (Smoking & Substance Abuse)

सिगरेट, वेपिंग और नशीले पदार्थों का सेवन रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ देता है और खून के थक्के (Blood Clots) बनने की संभावना बढ़ा देता है।

अनुवांशिक कारण (Genetics)

भारतीयों में आनुवंशिक रूप से हृदय रोगों का खतरा अधिक होता है। यदि परिवार में किसी को कम उम्र में हार्ट अटैक आया हो, तो जोखिम काफी बढ़ जाता है।

जिम सप्लीमेंट्स का गलत इस्तेमाल

बिना डॉक्टरी सलाह के भारी मात्रा में प्री-वर्कआउट स्टिमुलेंट्स या एनाबॉलिक स्टेरॉयड का सेवन दिल पर अचानक दबाव डाल सकता है।

अघोषित बीमारियां

डायबिटीज (Diabetes) और हाई ब्लड प्रेशर अब युवाओं में "साइलेंट किलर" की तरह बढ़ रहे हैं, जिनका समय पर पता नहीं चल पाता।

नींद की कमी

लगातार 6 घंटे से कम नींद लेना और "हसल कल्चर" (हमेशा काम में व्यस्त रहना) हृदय के रिकवरी चक्र को बिगाड़ देता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि 45% हार्ट अटैक "साइलेंट" होते हैं, जिन्हें लोग अक्सर गैस या एसिडिटी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।

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