इतिहास के पन्ने: 3 गोलियां, 78 साल का राज और ग्वालियर का वो 'खास' घर... महात्मा गांधी की हत्या की वो अनसुनी कहानी
नई दिल्ली। आज पूरा देश राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि मना उन्हें याद कर रहा है। इस दिन देश में शहीद दिवस मनाया जाता है। आज ही के दिन नाथूराम गोडसे ने बापू को 3 गोलियां मारकर उनकी हत्या कर दी थी। 30 जनवरी 1948 को बिरला हाउस में महात्मा गांधी की हत्या में इस्तेमाल हुई 'बेरेटा' पिस्टल और उससे निकली 3 गोलियों का रहस्य आज भी इतिहास के पन्नों में ग्वालियर से जुड़ा हुआ है।
इटली की वो 'फासिस्ट स्पेशल' पिस्टल
हत्या में इस्तेमाल हुई पिस्टल इटली की Beretta M1934 (सीरियल नंबर 606824) थी। इसे 1934 में मुसोलिनी के अधिकारियों के लिए बनाया गया था। माना जाता है कि यह हथियार अफ्रीका में इतालवी सेना की हार के बाद ब्रिटिश सेना के एक अधिकारी (जो ग्वालियर इन्फेंट्री से थे) द्वारा 'वॉर ट्रॉफी' के रूप में भारत लाया गया था।
ग्वालियर का वो 'खास' घर
नथूराम गोडसे 28 जनवरी 1948 को ग्वालियर पहुंचा था। यहां वह ग्वालियर स्टेट हिंदू महासभा के नेता और शाही परिवार के चिकित्सक डॉ. दत्तात्रेय सदाशिव परचुरे के घर (शिंदे की छावनी इलाका) में रुका था। इसी घर में गोडसे ने हथियारों के डीलर गंगाधर दंडवते से ₹300 के अग्रिम भुगतान पर वह बेरेटा पिस्टल खरीदी थी।
3 गोलियां और 78 साल का राज
आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, गोडसे ने बापू पर 3 गोलियां चलाई थीं। हालांकि, कई शोधकर्ता और याचिकाकर्ता (जैसे डॉ. पंकज फडनीस) यह दावा करते रहे हैं कि वहां चौथी गोली भी चली थी, जो गोडसे की 7-राउंड वाली मैगजीन से नहीं हो सकती थी। यह 'चौथी गोली' का रहस्य आज भी एक अनसुलझा सवाल बना हुआ है।
जांच का 'कमजोर लिंक'
ग्वालियर के इस हथियार कनेक्शन की पूरी जांच कभी नहीं हुई। पिस्टल असली मालिक (ग्वालियर महाराजा के एडीसी या सैन्य सचिव) से एक स्थानीय डीलर जगदीश प्रसाद गोयल तक कैसे पहुंची, इसका कोई स्पष्ट रिकॉर्ड पुलिस चार्जशीट में शामिल नहीं किया गया था।
आजादी से 7 दिन पहले रची गई थी महात्मा गांधी की हत्या की साजिश
यह दावा हाल के वर्षों में सामने आया है। अप्पू एस्थोस सुरेश और प्रियंका कोटमराजू द्वारा लिखी गई किताब "द मर्डरर, द मोनार्क एंड द फकीर: ए न्यू इन्वेस्टिगेशन ऑफ महात्मा गांधीज असैसिनेशन" में यह नया खुलासा किया गया है। लेखकों का दावा है कि गांधी जी की हत्या की साजिश 15 अगस्त 1947 (आजादी) से 7 दिन पहले ही यानी अगस्त 1947 के शुरुआती हफ्ते में शुरू हो गई थी।