प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों में होने वाला एक प्रमुख कैंसर है, लेकिन शुरुआती पहचान से इसका सफल इलाज संभव है। यह बीमारी प्रोस्टेट ग्रंथि में विकसित होती है, जो अखरोट के आकार की होती है और वीर्य उत्पादन में मदद करती है।
शुरुआती लक्षण (Early Symptoms)
शुरुआत में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होते, लेकिन बीमारी बढ़ने पर निम्नलिखित संकेत दिख सकते हैं:
पेशाब में बदलाव
बार-बार पेशाब आना, खासकर रात के समय।
प्रवाह में कमी
पेशाब की धारा का कमजोर होना या रुक-रुक कर आना।
दर्द या जलन
पेशाब करते समय या स्खलन (ejaculation) के दौरान दर्द महसूस होना।
रक्त की उपस्थिति
पेशाब या वीर्य में खून के अंश दिखना।
शारीरिक दर्द
पीठ के निचले हिस्से, कूल्हों या जांघों में लगातार दर्द रहना।
निदान और स्क्रीनिंग (Diagnosis)
डॉक्टर आमतौर पर दो प्रमुख टेस्ट की सलाह देते हैं
PSA टेस्ट
रक्त में प्रोस्टेट-विशिष्ट एंटीजन के स्तर की जांच।
DRE (डिजिटल रेक्टल एग्जाम)
शारीरिक जांच के जरिए ग्रंथि की बनावट को समझना।
बायोप्सी
यदि टेस्ट संदिग्ध हों, तो ऊतकों (tissues) की जांच की जाती है।
उपचार के विकल्प (Treatment Options)
उपचार कैंसर के स्टेज और मरीज की उम्र पर निर्भर करता है
सक्रिय निगरानी (Active Surveillance)
यदि कैंसर बहुत धीरे बढ़ रहा है, तो डॉक्टर केवल नियमित जांच करते हैं।
सर्जरी (Prostatectomy)
प्रोस्टेट ग्रंथि को ऑपरेशन के जरिए हटाना। आजकल रोबोटिक सर्जरी काफी सटीक परिणाम देती है।
रेडिएशन थेरेपी
उच्च-ऊर्जा किरणों से कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करना।
हार्मोन थेरेपी
शरीर में टेस्टोस्टेरोन के स्तर को कम करना, क्योंकि यह कैंसर के विकास को बढ़ावा देता है।
कीमोथेरेपी
उन्नत चरणों में दवाओं के जरिए कैंसर को फैलने से रोकना।
बचाव के उपाय
संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और 50 वर्ष की आयु के बाद वार्षिक स्क्रीनिंग कराकर जोखिम को कम किया जा सकता है।