सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, हरीश राणा को इच्छामृत्यु के लिए दी मंजूरी, हर किसी की आंखें नम...

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में हरीश राणा की लंबी बीमारी के दौरान उनके परिवार द्वारा दिखाए गए अटूट समर्थन को स्वीकार किया।

Update: 2026-03-11 05:49 GMT

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने आज एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। दरअसल आज  31 वर्षीय हरीश राणा के परिवार द्वारा दायर उस याचिका पर अपना निर्णय सुना दिया है जिसमें उनके लाइफ-सस्टेनिंग ट्रीटमेंट को वापस लेने की अनुमति मांगी गई है। बता दें कि कोर्ट ने इच्छामृत्यु के लिए मंजूरी दे दी है। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने ये फैसला सुनाया है।

क्या है पूरा मामला 

हरीश राणा 2013 में चौथी मंजिल से गिरने के कारण गंभीर रूप से घायल हो गए थे और इसी कारण उन्हें 100% क्वाड्रीप्लेजिक डिसेबिलिटी हो गई। पिछले 13 वर्षों से बिस्तर पर थे। उनके माता-पिता ने उनके निरंतर कष्ट को देखते हुए कोर्ट से उनके जीवन रक्षक उपकरण हटाने की गुहार लगाई थी। कोर्ट ने इस मामले में परिवार, मेडिकल बोर्ड और केंद्र सरकार के साथ लंबी और बहुस्तरीय चर्चा की है और जनवरी 2026 में फैसला सुरक्षित रखा गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने परिवार की तारीफ की

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में हरीश राणा की लंबी बीमारी के दौरान उनके परिवार द्वारा दिखाए गए अटूट समर्थन को स्वीकार किया। बेंच ने कहा कि राणा का परिवार कई साल बीत जाने के बावजूद भी उनका साथ नहीं छोड़ा और उनकी देखभाल करता रहा।

देश का पहला मामला

यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के 2018 के ऐतिहासिक फैसले (Common Cause बनाम भारत संघ) के सिद्धांतों को व्यावहारिक रूप से लागू करने वाला पहला मामला है, जिसमें 'सम्मान के साथ मरने के अधिकार' को मौलिक अधिकार माना गया था।

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