लोगों की बुरी नजर या आपके कर्म? प्रेमानंद महाराज ने बताई क्या है इस भ्रम की सच्चाई

Update: 2026-02-15 10:30 GMT

वृंदावन। वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद जी महाराज जी हमेशा ही अपने भक्तों का मार्गदर्शन करते रहते है। महाराज जी ने 'बुरी नजर' और 'कर्म' के बीच के भ्रम को स्पष्ट करते हुए बताया है कि जीवन में आने वाली बाधाएं असल में हमारे कर्मों का फल होती हैं, न कि किसी की नजर का परिणाम।

कर्म ही आधार है

महाराज जी के अनुसार, इंसान के जीवन में जो कुछ भी घटित होता है, उसका मूल आधार उसके अपने कर्म हैं। जब हम असफल होते हैं, तो अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए उसे 'बुरी नजर' या 'दुर्भाग्य' का नाम दे देते हैं। बुरी नजर का डर अक्सर मन की कमजोरी और नकारात्मक सोच से पैदा होता है। घर के बाहर जूता टांगना या मिर्च-नींबू लगाना महाराज जी ने अंधविश्वास बताया है।

नकारात्मक ऊर्जा से बचाव

उन्होंने सिखाया है कि जब मनुष्य ईश्वर (मायाधीश) से अपनी नजरें मिला लेता है, तो दुनिया की कोई भी नजर उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकती। भगवान का नाम एक ऐसे अदृश्य कवच की तरह है जिसे कोई नकारात्मक शक्ति भेद नहीं सकती।

महाराज जी के सुझाव

- घर के बाहर जूता या डरावने मुखौटे टांगने के बजाय भगवान की सुंदर तस्वीर या उनके नाम की पट्टी लगाएं।

- घर से निकलते समय 'राधा-राधा' या अपने इष्ट देव के नाम का जप करें।

- अपनी योजनाओं को दूसरों के सामने प्रकट करने के बजाय उन्हें गुप्त रखें, जिससे अनावश्यक बाधाओं से बचा जा सके।

- अंततः उनका संदेश है कि टोटकों के पीछे भागने के बजाय अपने आचरण और कर्मों को सुधारें, क्योंकि भक्ति ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है। 

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