चेयर पर बैठने पर स्पीकर का रोल भेदभाव रहित होना चाहिए, इसमें दो मत नहीं है...लोकसभा में बोले-किरेन रिजिजू

Update: 2026-03-10 09:13 GMT

नई दिल्ली। लोकसभा में किरेन रिजिजू ने स्पीकर को मिले अधिकारों का उल्लेख किया और कानूनी पहलुओं का भी जिक्र करते हुए कहा कि स्पीकर के किसी भी निर्णय को कोर्ट में चैलेंज नहीं किया जा सकता। स्पीकर निष्पक्ष होते हैं, लेकिन एक पार्टी खासकर रूलिंग पार्टी से आती है। यह भी सभी जानते हैं। हमारी व्यवस्था थोड़ी हटकर हो, ये संविधान निर्माताओं ने सोचा।

स्पीकर का रोल भेदभाव रहित होना चाहिए

उन्होंने आगे कहा कि संविधान निर्माताओं ने सोचा कि स्पीकर को रिजाइन करने की जरूरत नहीं है। चुनाव में उसे भी किसी पार्टी से जाना होता है। 2005 में सोमनाथ चटर्जी ने मुझे भी मौका दिया, मैंने यूके में ये कहा कि हमारी व्यवस्था अलग है। चेयर पर बैठने पर स्पीकर का रोल भेदभाव रहित होना चाहिए, इसमें दो मत नहीं है।

सदन में बोलने के लिए स्पीकर की परमिशन जरूरी है

स्पीकर के किसी भी निर्णय को किसी ने चैलेंज नहीं किया है। नेता प्रतिपक्ष ने खड़े होकर कहा कि मुझे यहां बोलने के लिए किसी से परमिशन नहीं चाहिए। सदन में बोलना मेरा अधिकार है। मुझे दुख हुआ। कांग्रेस में कई वरिष्ठ लोग भी हैं। नेता प्रतिपक्ष को क्यों नहीं समझाया कि प्रधानमंत्री, मंत्री कोई भी हो, सदन में बोलने के लिए स्पीकर की परमिशन जरूरी है। 

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