नई दिल्ली। महावीर जयंती जैन धर्म का एक प्रमुख और पवित्र पर्व है, जिसे हर साल बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। महावीर जयंती 31 मार्च 2026 को मनाई जाएगी। जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर का जन्म चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को हुआ था।
भगवान महावीर के पंच महाव्रत
अहिंसा: भगवान महावीर से हर परिस्थिति में हिंसा से बचने का संदेश दिया है. उन्होंने कहा है कि मन, वचन और कर्म से किसी भी जीव को कष्ट न दें।
सत्य: जो व्यक्ति सत्य के मार्ग पर चलता है वो मृत्यु जैसी कठिन राह को भी पार कर लेता है। यही कारण है कि उन्होंने सदा लोगों को सत्य बोलने और झूठ से दूर रहने के लिए प्रेरित किया।
अस्तेय: भगवान महावीर ने अस्तेय का पालन करने के लिए कहा है। यानी जो चीज स्वेच्छा से न दी जाए उसको ग्रहण न करें. ऐसा करने से जीवन में हमेशा सयंम बना रहता है।
ब्रह्मचर्य: इसका अर्थ है कि आप अपनी इंद्रियों और इच्छाओं को नियंत्रित रखें।
अपरिग्रह: अपरिग्रह का अभ्यास करने से जैनों की आत्मिक चेतना का विकास होता है। वो दुनिया की भौतिक वस्तुओं और भोग-विलास की चीजों से दूरी बना लेते हैं।
भगवान महावीर क्यों प्रसिद्ध हुए?
त्याग और तपस्या: एक राजपरिवार (राजकुमार वर्धमान) में जन्म लेने के बावजूद, उन्होंने 30 वर्ष की आयु में राजसी सुखों को त्याग दिया और सत्य की खोज में 12 वर्षों तक कठिन तपस्या की।
जैन धर्म का पुनरुद्धार: उन्होंने प्राचीन जैन परंपराओं को व्यवस्थित किया और उन्हें सरल भाषा में जन-जन तक पहुंचाया।
समानता का संदेश: उन्होंने जातिवाद और ऊँच-नीच का विरोध करते हुए सिखाया कि सभी आत्माएं समान हैं और हर जीव में ईश्वर बनने की शक्ति है।
अहिंसा परमो धर्म: उन्होंने "जिओ और जीने दो" का अमर संदेश दिया, जो आज भी दुनिया भर में शांति और करुणा का प्रतीक माना जाता है।
कैसे मनाते है महावीर जयंती
- जैन मंदिरों में भगवान महावीर की प्रतिमा का जल, दूध, केसर और चंदन से अभिषेक (स्नान) किया जाता है।
- भव्य रथ यात्राएं निकाली जाती हैं, जिसमें धार्मिक भजन-कीर्तन होते हैं।
- लोग गरीब और जरूरतमंदों को दान देते हैं।
- लोग उपवास रखते हैं और सात्विक (प्याज-लहसुन रहित) भोजन करते हैं।
- अहिंसा और दया का संदेश देने के लिए रैलियाँ आयोजित की जाती हैं।