लव मैरिज में पति-पत्नी के अंदर क्यों जाग जाता है अंदर का बच्चा? जानें इसके पीछे क्या कहता है मनोविज्ञान
कई बार लव मैरिज में पति-पत्नी का एक-दूसरे के प्रति प्यार बच्चों जैसा (निस्वार्थ और मासूम) हो जाता है। इसके कई मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक कारण हैं। हालांकि मनोविज्ञान के अनुसार, रोमांटिक प्यार अक्सर उसी तरह के 'अटैचमेंट' पर आधारित होता है जैसा बचपन में माता-पिता और बच्चे के बीच होता है। इसलिए, एक-दूसरे को बच्चों जैसा प्यार करना रिश्ते में गहराई और ताजगी बनाए रखता है।
सुरक्षा और भरोसा
जैसे बच्चा अपने माता-पिता के पास सुरक्षित महसूस करता है, वैसे ही एक गहरे रिश्ते में साथी एक-दूसरे को 'सुरक्षित स्थान' (Secure Base) मानते हैं।
भावनात्मक निर्भरता
लव मैरिज में अक्सर गहरी आत्मीयता होती है, जिससे वे एक-दूसरे के सामने अपनी कमियां दिखाने में हिचकिचाते नहीं हैं और बच्चों की तरह एक-दूसरे के लाड़-प्यार की उम्मीद करते हैं।
बिना शर्त स्वीकार करना
सच्चे प्यार में पार्टनर एक-दूसरे की छोटी-छोटी आदतों और शरारतों को बच्चों की तरह मासूमियत से स्वीकार कर लेते हैं।
देखभाल की भावना
जैसे माता-पिता बच्चों का ख्याल रखते हैं, वैसे ही पति-पत्नी एक-दूसरे की छोटी जरूरतों का बिना कहे ध्यान रखने लगते हैं।
तनाव से मुक्ति
दुनिया की भागदौड़ के बीच, अपने साथी के साथ बच्चों जैसी मस्ती करना और वैसा ही प्यार पाना मानसिक शांति और खुशी देता है।