बद्रीनाथ-केदारनाथ सहित 47 मंदिरों में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर लगी रोक, जानें किन लोगों को प्रतिबंध से रखा बाहर
देहरादून। बद्रीनाथ और केदारनाथ सहित अपने अधीन आने वाले 47 मंदिरों में गैर-हिंदुओं (गैर-सनातनियों) के प्रवेश पर बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) ने पूरी तरह से रोक लगा दी है। बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई। बता दें कि यह फैसला देहरादून स्थित मंदिर समिति के ऑफिस में हुई बजट बैठक में लिया गया है, जिसकी अध्यक्षता बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने की है।
गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर क्यों लगी रोक
अध्यक्ष ने जानकारी देते हुए कहा कि, समिति चारधाम तीर्थस्थलों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि, यह फैसला इसलिए लिया गया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि केवल वही लोग चारधाम तीर्थों और अन्य मंदिरों में दर्शन करने जाएं जो सनातन धर्म में आस्था रखते हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह प्रतिबंध गर्भगृह और मंदिर परिसर में लागू होगा। द्विवेदी ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि, इसका उद्देश्य उत्तराखंड के मंदिरों की पवित्रता को बनाए रखना है।
इन लोगों को प्रतिबंध से रखा बाहर
सिख, जैन और बौद्ध धर्मावलंबियों को सामान्यतः इस प्रतिबंध से बाहर रखा गया है क्योंकि उन्हें सनातन धर्म का हिस्सा माना जाता है। साथ ही यह प्रतिबंध केवल मंदिर परिसर और गर्भगृह के लिए है। तीर्थयात्रियों को ले जाने वाले अन्य धर्मों के सेवा प्रदाताओं (घोड़ा-खच्चर, कुली आदि) की आजीविका पर इसका असर नहीं पड़ेगा।
चारों धामों के लिए कब खुलेंगे कपाट
केदारनाथ धाम: केदारनाथ के कपाट 22 अप्रैल 2026 को सुबह 8:00 बजे श्रद्धालुओं के लिए खुलेंगे। इसकी घोषणा महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में पारंपरिक पंचांग गणना के बाद की गई थी।
बद्रीनाथ धाम: बद्रीनाथ के कपाट 23 अप्रैल 2026 को सुबह 6:15 बजे खुलेंगे। बसंत पंचमी के अवसर पर टिहरी राजदरबार में आयोजित एक समारोह के दौरान इस तिथि का ऐलान किया गया था।
गंगोत्री और यमुनोत्री: इन दोनों धामों के कपाट अक्षय तृतीया के दिन यानी 19 अप्रैल 2026 को खुलेंगे।