सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की NAT को अनिवार्य बनाने वाली याचिका, कहा- महंगी प्रक्रिया है...
कोर्ट ने कहा कि NAT एक महंगी प्रक्रिया है। इसे अनिवार्य बनाने से उन राज्यों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा जो पहले से ही वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं।
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आज अहम सुनवाई की है। दरअसल कोर्ट ने ब्लड बैंकों में न्यूक्लिक एसिड टेस्ट (NAT) को अनिवार्य बनाने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने साफ तौर पर कहा है कि कोर्ट ने जनहित याचिका खारिज करते हुए कहा कि NAT टेस्टिंग को अनिवार्य बनाया जाना चाहिए या नहीं। यह निर्धारित करने में विशेष चिकित्सा ज्ञान और नीतिगत विचार शामिल हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इसकी सुनवाई की है।
क्या है NAT का फायदा
पारंपरिक सीरोलॉजिकल परीक्षणों की तुलना में NAT का एक महत्वपूर्ण लाभ यह है कि ये 'विंडो पीरियड' को कम कर देता है। विंडो पीरियड वह समय होता है जब संक्रमण हो चुका होता है किंतु सामान्य परीक्षणों में वह दिखाई नहीं देता है। इस कारण NAT रक्त की सुरक्षा को अधिक सुनिश्चित करता है।
राज्यों पर वित्तीय बोझ हो सकता है
कोर्ट ने कहा कि NAT एक महंगी प्रक्रिया है। इसे अनिवार्य बनाने से उन राज्यों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा जो पहले से ही वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं और अपने कर्मचारियों को वेतन देने में भी कठिनाई महसूस कर रहे हैं।
याचिका में क्या तर्क दिए गए थे
जानकारी के मुताबिक याचिका में तर्क दिया गया था कि अनुच्छेद 21 के तहत "सुरक्षित रक्त का अधिकार" जीवन के मौलिक अधिकार का हिस्सा है, क्योंकि NAT तकनीक HIV और हेपेटाइटिस जैसे संक्रमणों को पारंपरिक परीक्षणों (ELISA) की तुलना में बहुत पहले पहचानने में सक्षम है।