रहस्यों से भरा है ये ज्योतिर्लिंग! खिलजी-गजनवी से औरंगजेब के हमलों के बाद भी टिकी रही बुनियाद, जानें क्या है नाम

Update: 2026-01-09 02:30 GMT

नई दिल्ली। सोमनाथ मंदिर गुजरात के वेरावल के पास स्थित भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से पहला और सबसे पवित्र मंदिर है। जो भगवान शिव को समर्पित है और हिंदू आस्था का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। जिसका इतिहास कई बार आक्रमण और पुनर्निर्माण का गवाह रहा है। वर्तमान मंदिर का उद्घाटन 1951 में हुआ और यहां हर शाम लाइट एंड साउंड शो भी होता है।

प्रथम ज्योतिर्लिंग: पौराणिक कथाओं के अनुसार, सोमनाथ (चंद्र देव) ने स्वयं इस मंदिर का निर्माण सोने से किया था।

पुनरुत्थान का प्रतीक: इस मंदिर को इतिहास में कई बार विदेशी आक्रमणकारियों (जैसे 1026 ईस्वी में महमूद गजनवी) द्वारा नष्ट और लूटा गया।

आधुनिक निर्माण: वर्तमान मंदिर का पुनर्निर्माण भारत की स्वतंत्रता के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रयासों से हुआ और 11 मई, 1951 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने यहाँ प्राण-प्रतिष्ठा की।

2026 का महत्व: जनवरी 2026 में गजनवी के आक्रमण के 1,000 वर्ष पूरे हो रहे हैं, जिसे 'विध्वंस पर पुनर्निर्माण की विजय' के रूप में याद किया जा रहा है।

पौराणिक कथा

चंद्रमा (सोम) ने दक्ष प्रजापति के श्राप से मुक्ति पाने के लिए यहां भगवान शिव की आराधना की थी, जिससे प्रसन्न होकर शिव ने सोमनाथ के रूप में यहां वास किया। श्रीकृष्ण ने भी इसी क्षेत्र के भालुका तीर्थ पर देह त्याग किया था, जिससे इसका महत्व और बढ़ गया।

वास्तुकला की विशेषताएं

शिल्प शैली: यह मंदिर चालुक्य शैली (मारु-गुर्जर शैली) में निर्मित है।

बाण स्तंभ: मंदिर परिसर में एक 'बाण स्तंभ' है जो यह दर्शाता है कि सोमनाथ से अंटार्कटिका तक समुद्र के बीच कोई भी भूमि या द्वीप नहीं है।

शिखर: मंदिर का मुख्य शिखर 155 फीट ऊंचा है और इसके ऊपर 10 टन वजन का कलश स्थापित है।

दर्शन और आरती का समय (2026 के अनुसार)

दर्शन: सुबह 6:00 बजे से रात 10:00 बजे तक।

आरती: दिन में तीन बार होती है - सुबह 7:00 बजे, दोपहर 12:00 बजे और शाम 7:00 बजे।

लाइट एंड साउंड शो: प्रतिदिन रात 8:00 बजे से 9:00 बजे तक 'जय सोमनाथ' लाइट एंड साउंड शो का आयोजन होता है। 

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