नए रिश्तों में पार्टनर से क्यों करते हैं ज्यादा बात! इन बातों का रखें ध्यान, इसके पीछे मनोवैज्ञानिक कारण

Update: 2026-02-22 19:40 GMT

नए रिश्तों में पार्टनर से ज्यादा बात करने के पीछे कई मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक कारण होते हैं। शुरुआत में यह जुड़ाव बनाने का एक स्वाभाविक तरीका है। 

एक-दूसरे को जानना (Getting to Know Each Other)

नए रिश्ते में आप एक-दूसरे के लिए अजनबी होते हैं। ज्यादा बात करने से आप पार्टनर की पसंद-नापसंद, आदतों और विचारों को समझ पाते हैं।

डोपामाइन रश (Dopamine Rush)

शुरुआती समय में दिमाग में 'डोपामाइन' (फील-गुड हार्मोन) का स्तर बढ़ जाता है, जिससे पार्टनर से बात करने की लत सी महसूस होती है और उत्साह बना रहता है।

भावनात्मक जुड़ाव (Emotional Connection)

ज्यादा और गहरी बातें करने से विश्वास (Trust) और आत्मीयता (Intimacy) बढ़ती है, जो रिश्ते की नींव को मजबूत बनाती है।

अनिश्चितता कम करना (Reducing Uncertainty)

 शुरुआत में असुरक्षा या रिजेक्शन का डर हो सकता है। लगातार बात करने से यह सुनिश्चित होता है कि सामने वाला व्यक्ति भी आप में उतनी ही दिलचस्पी ले रहा है।

समानताएं और 'डील-ब्रेकर्स' ढूंढना

बातचीत के जरिए आप यह जान पाते हैं कि आप दोनों के बीच क्या समानताएं हैं और क्या ऐसी बातें हैं जो भविष्य में समस्या बन सकती हैं। 

ध्यान रखने योग्य बातें

 हालांकि शुरुआत में ज्यादा बात करना सामान्य है, लेकिन अपनी व्यक्तिगत स्वतंत्रता (Autonomy) और अन्य जिम्मेदारियों को भी महत्व देना चाहिए। केवल घंटों बात करने से ज्यादा जरूरी 'क्वालिटी टॉक' (गहरी और सार्थक बातें) है, जिससे सच्चा जुड़ाव महसूस हो।

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