मकर संक्रांति में सूर्य की उपासना क्यों है खास, जानें इसके धार्मिक और वैज्ञानिक कारण
मकर संक्रांति में सूर्य की उपासना इसलिए विशेष मानी जाती है क्योंकि यह पर्व सूर्य के उत्तरायण होने और जीवनदायी ऊर्जा के जाग्रत होने का प्रतीक है। इसे धर्म, विज्ञान और प्रकृति तीनों दृष्टि से अत्यंत शुभ माना गया है।
मकर संक्रांति में सूर्य उपासना क्यों खास है?
सूर्य का उत्तरायण होना
मकर संक्रांति के दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है।
इस दिन से सूर्य की गति दक्षिण से उत्तर की ओर हो जाती है, जिसे उत्तरायण कहते हैं।
उत्तरायण काल को देवताओं का दिन और अत्यंत शुभ समय माना गया है।
सूर्य का मतलब जीवन और ऊर्जा
सूर्य को जीवन, स्वास्थ्य, तेज और आत्मबल का स्रोत माना गया है।
मकर संक्रांति पर सूर्य की किरणें शरीर और मन पर सकारात्मक प्रभाव डालती हैं।
इसलिए इस दिन सूर्य को अर्घ्य (जल) देना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।
पापों से मुक्ति और पुण्य की प्राप्ति
शास्त्रों में कहा गया है कि मकर संक्रांति पर सूर्य उपासना से रोग नष्ट होते हैं। पापों का क्षय होता है। आयु और यश की वृद्धि होती है।
महाभारत और भीष्म पितामह
भीष्म पितामह ने उत्तरायण की प्रतीक्षा कर देह त्याग किया था। इससे उत्तरायण और सूर्य की महिमा और बढ़ जाती है।
वैज्ञानिक दृष्टि से
शीत ऋतु के बाद सूर्य की किरणें अधिक लाभकारी हो जाती हैं। सूर्य स्नान और जल अर्पण से विटामिन-D मिलता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है
मानसिक तनाव कम होता है।
मकर संक्रांति पर सूर्य उपासना कैसे करें?
प्रातः स्नान कर तांबे के पात्र में जल, लाल फूल, रोली डालकर सूर्य को अर्घ्य दें
मंत्र जप करें:
ॐ सूर्याय नमः या गायत्री मंत्र
तिल, गुड़, खिचड़ी, कंबल और अन्न दान करें।