होर्मुज खुलवाने को लेकर हुई हाई लेवल मीटिंग! भारत सहित 60 देश हुए शामिल, जानें विदेश मंत्रालय ने क्या कहा
नई दिल्ली। खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव और 'होर्मुज जलडमरूमध्य' के चोक होने के बीच एक बहुत बड़ी वैश्विक कूटनीतिक हलचल शुरू हुई है। होर्मुज के रास्ते को फिर से खुलवाने और दुनियाभर में तेल-गैस की आपूर्ति को सुचारू करने के लिए ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर ने एक आपातकालीन बैठक बुलाई। इस बैठक में दुनिया के 60 से ज्यादा देश शामिल हुए।
जहाजों की बेरोकटोक आवाजाही हर देश का हक
बता दें कि भारत ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हुए बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। वहीं इस हाई-प्रोफाइल बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने किया। उन्होंने दुनियाभर के देशों के सामने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों पर जहाजों की बेरोकटोक आवाजाही हर देश का हक है। इससे कोई समझौता नहीं हो सकता। विदेश सचिव ने चिंता जताई कि इस पूरे संकट का सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ रहा है।
600 सैनिकों की सुरक्षा को लेकर दिया कड़ा संदेश
बता दें कि ब्रिटेन की ओर से बुलाई गई बैठक में सबसे महत्वपूर्ण बात जो भारत ने दुनिया के सामने रखी, वह थी भारतीय नागरिकों की सुरक्षा। विदेश सचिव ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों में भारत इकलौता ऐसा देश है, जिसने अपने जांबाज नाविकों को खोया है। उन्होंने कहा कि इस समस्या का हल और अधिक युद्ध नहीं है। अगर दुनिया को इस संकट से बाहर निकलना है, तो सभी पक्षों को तुरंत हथियारों को शांत कर बातचीत की मेज पर लौटना होगा। पश्चिम एशिया के सुलगते माहौल के बीच भारत ने लेबनान में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के तहत तैनात अपने करीब 600 सैनिकों की सुरक्षा को लेकर कड़ा संदेश दिया है। विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि शांति सैनिकों पर हो रहे हमले बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।
ईरान के साथ ऐसी चर्चा नहीं हुई
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि होर्मुज का रास्ता भारत के लिए अहम है। इसी रास्ते से देश में भारी मात्रा में रसोई गैस (LPG), नेचुरल गैस (LNG) और कच्चा तेल आता है। भारत की बैक-चैनल डिप्लोमेसी और लगातार की जा रही बातचीत का ही नतीजा है कि पिछले कुछ दिनों में 6 भारतीय जहाज होर्मुज को सुरक्षित पार करने में सफल रहे हैं। इसके अलावा, प्रवक्ता ने उन अफवाहों का भी पूरी तरह खंडन कर दिया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि ईरान इस रास्ते से गुजरने वाले भारतीय जहाजों पर भारी-भरकम 'टोल टैक्स' वसूलने की तैयारी कर रहा है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि ईरान के साथ ऐसी चर्चा नहीं हुई है।